कोर्ट संख्या-36 में क्रमांक-54 पर सूचीबद्ध है रिट-सी संख्या 23749/2026, पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्नों पर होगी सुनवाई
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के समयबद्ध आयोजन तथा ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति से संबंधित बहुचर्चित रिट-सी संख्या 23749/2026 की महत्वपूर्ण सुनवाई 13 जुलाई 2026 (सोमवार) को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में निर्धारित है। उच्च न्यायालय द्वारा जारी कॉज लिस्ट के अनुसार यह वाद कोर्ट संख्या-36 में क्रमांक-54 पर माननीय एकलपीठ के समक्ष सूचीबद्ध है।
यह प्रकरण पंचायती राज संस्थाओं की संवैधानिक व्यवस्था, लोकतांत्रिक निरंतरता, ग्राम स्वशासन की अवधारणा तथा संविधान के भाग-IX के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण विधिक एवं जनहित के प्रश्नों से संबंधित है। ऐसे में प्रदेश के समस्त पंचायत प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों, विधि विशेषज्ञों एवं ग्रामीण विकास से जुड़े सभी पक्षों की दृष्टि इस सुनवाई पर केंद्रित है।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन, जो देशभर में पंचायती राज संस्थाओं के अधिकारों, सशक्तीकरण, ग्राम स्वराज तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सतत कार्यरत एक अग्रणी राष्ट्रीय संगठन है, ने भी इस महत्वपूर्ण वाद में माननीय न्यायालय के समक्ष अपना प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत कर विधिसम्मत रूप से पक्ष रखा है।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी एवं राष्ट्रीय महासचिव राजमणी पाण्डेय के समन्वय में वरिष्ठ अधिवक्ता श्री राजीव मिश्रा तथा अधिवक्ता श्री संदीप सिंह के माध्यम से संगठन का पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। संगठन का उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं की स्वायत्तता, निर्वाचित पंचायतों की निरंतरता तथा पंचायत प्रतिनिधियों के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों के संरक्षण हेतु न्यायिक प्रक्रिया में सकारात्मक एवं रचनात्मक सहभागिता सुनिश्चित करना है।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने पुनः स्पष्ट किया है कि वह संविधान की मूल भावना, विधि के शासन, लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा तथा पंचायती राज व्यवस्था की स्वायत्तता के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। संगठन का विश्वास है कि पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त, उत्तरदायी एवं प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक वैधानिक एवं संवैधानिक मंच पर रचनात्मक भूमिका निभाना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
संगठन ने आशा व्यक्त की है कि माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित होने वाला निर्णय पंचायती राज संस्थाओं की संवैधानिक गरिमा, लोकतांत्रिक परंपराओं तथा ग्रामीण स्वशासन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा तथा प्रदेश की करोड़ों ग्रामीण जनता एवं पंचायत प्रतिनिधियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करेगा।
