ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने तथा शीर्ष जिम्मेदारियों में 50 प्रतिशत महिलाओं को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता दोहराई
लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय महिला समानता दिवस के अवसर पर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने समस्त मातृशक्ति, बहनों एवं बेटियों को शुभकामनाएँ देते हुए महिला समानता, सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
संगठन का मानना है कि महिलाओं की भागीदारी केवल औपचारिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें नेतृत्व और निर्णय लेने की प्रक्रिया में प्रभावी भूमिका मिलनी चाहिए। इसी उद्देश्य से संगठन में शीर्ष एवं महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में 50 प्रतिशत महिलाओं को प्राथमिकता देने की दिशा में निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा—
“महिला समानता केवल एक दिवस का विषय नहीं, बल्कि समाज के निरंतर विकास का आधार है। हमारा स्पष्ट संकल्प है कि ग्रामीणसत्ता पंचायतीराज संगठन में शीर्ष नेतृत्व एवं महत्वपूर्ण दायित्वों में 50 प्रतिशत महिलाओं को प्राथमिकता दी जाए, ताकि मातृशक्तिअपनी क्षमता, प्रतिभा और नेतृत्व के माध्यम से संगठन तथा पंचायतीराज व्यवस्था को नई दिशा दे सके।”
उन्होंने कहा कि गाँवों के विकास में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब महिलाएँ निर्णय प्रक्रिया में आगे आएँगी, तो पंचायतों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षा, आजीविका और सामाजिक विकास से जुड़े विषयों को और प्रभावी ढंग से प्राथमिकता मिलेगी।
श्री अवस्थी ने कहा कि बेटी को अवसर देना, महिला को सम्मान देना और महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाना—सशक्त समाज की पहचान है। संगठन महिला प्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं को नेतृत्व के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने सभी पंचायत प्रतिनिधियों एवं ग्रामीण नागरिकों से आह्वान किया कि वे महिलाओं के सम्मान, समान अधिकार और नेतृत्व को बढ़ावा देने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ।
संगठन का संकल्प—
“50% महिला नेतृत्व • समान अधिकार • समान अवसर • सुरक्षित समाज • सशक्त पंचायत”
