ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए शिक्षा, ज्ञान और जागरूकता को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का आह्वान किया।
साक्षरता केवल अक्षर ज्ञान नहीं, जीवन को दिशा देने वाली शक्ति

विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने की क्षमता नहीं, बल्कि अज्ञान से ज्ञान, निराशा से आशा और निर्भरता से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का माध्यम है। यह व्यक्ति में आत्मविश्वास विकसित करती है और उसे अपने अधिकारों, कर्तव्यों तथा उपलब्ध अवसरों के प्रति सजग बनाती है।
पुस्तकों से खुलते हैं विचारों के द्वार
उन्होंने कहा कि जिस समाज में पुस्तकें खुलती हैं, वहाँ विचार और चिंतन भी विस्तार पाते हैं। साक्षरता से बच्चों को सपनों को आकार देने का अवसर मिलता है और नागरिकों में लोकतांत्रिक मूल्यों तथा सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति समझ विकसित होती है।
साक्षर भारत के निर्माण में गाँव और पंचायतों की अहम भूमिका
उन्होंने कहा कि गाँव और ग्राम पंचायतें साक्षरता के विस्तार की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। पंचायत भवन, चौपाल और स्थानीय सामुदायिक मंचों के माध्यम से बच्चों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों को शिक्षा तथा जागरूकता से जोड़ा जा सकता है। स्थानीय स्तर पर ऐसे प्रयास ग्रामीण समाज को अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
शिक्षा के साथ अधिकारों और अवसरों की जानकारी भी जरूरी
विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि साक्षरता का लाभ तभी व्यापक होगा, जब हर बच्चा शिक्षा से जुड़े, महिलाएँ सशक्त हों तथा किसान और श्रमिक अपने अधिकारों एवं उपलब्ध अवसरों से परिचित हों। ज्ञान सामाजिक समानता, आर्थिक आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास की मजबूत आधारशिला है।
एक व्यक्ति से पूरे समाज तक पहुँचे ज्ञान का प्रकाश
उन्होंने कहा, “एक व्यक्ति साक्षर बने, तो एक जीवन बदलेगा; एक परिवार साक्षर बने, तो एक पीढ़ी बदलेगी और जब पूरा समाज साक्षर होगा, तो राष्ट्र का भविष्य बदलेगा।”
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर उन्होंने अपनी ओर से तथा ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन की ओर से संकल्प व्यक्त किया कि गाँवों और पंचायतों से लेकर देश के प्रत्येक क्षेत्र तक शिक्षा और जागरूकता की ज्योति पहुँचाने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।
