10,976 पुस्तकों की आपूर्ति, 9,909 लाइब्रेरी में फर्नीचर और 20,000 से अधिक डिजिटल संसाधनों की सुविधा

लखनऊ। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने और गुणवत्तापूर्ण अध्ययन संसाधनों की पहुंच बढ़ाने की दिशा में ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी की पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके माध्यम से ग्रामीण भारत के बच्चों एवं युवाओं को ज्ञान, शिक्षा और डिजिटल तकनीक से जोड़ते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला तैयार की जा रही है।
डिजिटल लाइब्रेरी के तहत विद्यार्थियों को ई-बुक्स, वीडियो लेक्चर, ऑडियो कंटेंट, डिजिटल लर्निंग मॉड्यूल और इंटरैक्टिव क्विज जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे विद्यार्थियों को अपनी सुविधा के अनुसार अध्ययन करने के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी उपयोगी डिजिटल सामग्री उपलब्ध हो रही है।
इस पहल के अंतर्गत 10,976 पुस्तकों की आपूर्ति, 9,909 लाइब्रेरी में फर्नीचर की स्थापना तथा 20,000 से अधिक डिजिटल संसाधनों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। प्रत्येक डिजिटल लाइब्रेरी के लिए पुस्तकों, आईटी उपकरणों और फर्नीचर सहित लगभग 4 लाख रुपये तक के निवेश का प्रावधान दर्शाया गया है।
ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का नया अवसर

डिजिटल लाइब्रेरी गांवों में विद्यार्थियों को शहरों जैसी आधुनिक अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर एवं ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री और डिजिटल शिक्षा के समान अवसर मिल सकते हैं।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि—
“डिजिटल लाइब्रेरी गांव के विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और अवसरों का नया द्वार है। आज के डिजिटल युग में ग्रामीण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पुस्तकें, ई-लर्निंग, वीडियो लेक्चर और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की आधुनिक सुविधाएं गांव में ही उपलब्ध होना शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन है। हमारा संगठन ऐसी पहल का स्वागत करता है और हमारा प्रयास रहेगा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिक्षा, तकनीक और ज्ञान के बेहतर संसाधनों की पहुंच सुनिश्चित हो।”
उन्होंने कहा कि “ज्ञान, शिक्षा और डिजिटल तकनीक का संगम ही सशक्त ग्रामीण भारत की मजबूत नींव तैयार करेगा।”
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन का मानना है कि ग्राम पंचायतों को केवल बुनियादी सुविधाओं तक सीमित न रखते हुए उन्हें ज्ञान, कौशल, डिजिटल शिक्षा और युवा सशक्तीकरण के केंद्र के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है।
