ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन का किया स्वागत, कारीगरों तक समयबद्ध लाभ पहुंचाने की अपील
लखनऊ। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। योजना के अंतर्गत 18 पारंपरिक ट्रेडों से जुड़े कारीगरों एवं शिल्पकारों को कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट सहायता, बिना गारंटी ऋण तथा ब्रांडिंग और मार्केटिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पारंपरिक हुनर को नई पहचान देने वाली महत्वपूर्ण पहल बताते हुए इसका स्वागत किया है। संगठन का मानना है कि गांवों में पीढ़ियों से पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को यदि प्रशिक्षण, तकनीक, पूंजी और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे रोजगार मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले उद्यमी बन सकते हैं।
कारीगरों को हुनर से बाजार तक जोड़ना जरूरी
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना केवल आर्थिक सहायता की योजना नहीं, बल्कि भारत की पारंपरिक कला, शिल्प और स्थानीय हुनर को संरक्षित करते हुए उसे आधुनिक बाजार से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा, “गांवों में हमारे विश्वकर्मा समाज और पारंपरिक कारीगर सदियों से अपने हुनर के माध्यम से समाज की आवश्यकताओं को पूरा करते आए हैं। आवश्यकता है कि उनके कौशल को आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर टूलकिट, आसान ऋण और बाजार की सुविधा से जोड़ा जाए। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।”
श्री अवस्थी ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर पात्र कारीगरों की पहचान, योजना की जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार तथा आवेदन और लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि कोई भी पात्र कारीगर जानकारी के अभाव में योजना के लाभ से वंचित न रहे।
उन्होंने आगे कहा कि “स्थानीय कारीगरों की आय बढ़ेगी तो गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और आत्मनिर्भर गांव का सपना और अधिक साकार होगा।”
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने केंद्र एवं राज्य सरकार से अपेक्षा की है कि योजना के लाभों की जानकारी ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएं और पात्र कारीगरों को प्रशिक्षण, ऋण, टूलकिट तथा विपणन सहायता का लाभ पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाए।
संगठन का संदेश
“कारीगर का हुनर, गांव की ताकत और आत्मनिर्भर भारत की पहचान है। पारंपरिक हुनर को सम्मान, आधुनिक तकनीक को प्रोत्साहन और उत्पाद को बाजार—इन्हीं तीन आधारों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दी जा सकती है।”
