विश्व संस्कृत दिवस पर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन की ओर से संस्कृत प्रेमियों, विद्वतजनों एवं प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं

लखनऊ। विश्व संस्कृत दिवस के अवसर पर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन एवं संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थीने समस्त संस्कृत प्रेमियों, विद्वतजनों, विद्यार्थियों एवं प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
इस अवसर पर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि—
“भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे—संस्कृतं संस्कृतिस्तथा।”
संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की सनातन ज्ञान-परंपरा, दर्शन, साहित्य, विज्ञान, अध्यात्म एवं संस्कृति की दिव्य अभिव्यक्ति है। संस्कृत ने भारतीय सभ्यता के बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विकास में सदियों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि संस्कृत की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। आधुनिक समय में संस्कृत के अध्ययन, अध्यापन, शोध एवं व्यापक प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देकर हम अपनी गौरवशाली ज्ञान-परंपरा को और सुदृढ़ कर सकते हैं।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने आह्वान किया कि संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन को केवल एक दिवस तक सीमित न रखते हुए इसे शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक चेतना के व्यापक अभियान से जोड़ा जाए।
विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि “देवभाषा संस्कृत हमारी सांस्कृतिक पहचान और ज्ञान की अमूल्य धरोहर है। आइए, विश्व संस्कृत दिवस पर हम सभी इसके संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक प्रचार-प्रसार का संकल्प लें।”
इस अवसर पर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन की ओर से देश-प्रदेश के समस्त संस्कृत विद्वानों, आचार्यों, विद्यार्थियों एवं संस्कृत प्रेमियों को विश्व संस्कृत दिवस की हार्दिक मंगलकामनाएं प्रेषित की गईं।
