धारा 36 के तहत विकास कार्यों के लिए ऋण लेने की शक्ति, निर्धारित प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के बिना बैंक से कर्ज लेना नहीं होगा वैध
लखनऊ। ग्राम पंचायतों के सामने कई बार ऐसे विकास कार्य आते हैं, जिनके लिए पंचायत निधि पर्याप्त नहीं होती। ऐसी स्थिति में ग्राम पंचायतों के लिए उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 में ऋण लेने का स्पष्ट कानूनी प्रावधान किया गया है। अधिनियम की धारा 36 (Power to Borrow) ग्राम पंचायत को निर्धारित प्रक्रिया और शर्तों के अधीन ऋण लेने की शक्ति प्रदान करती है।
धारा 36 के अनुसार ग्राम पंचायत राज्य सरकार से ऋण ले सकती है। इसके अतिरिक्त निर्धारित प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति तथा निर्धारित शर्तों के अधीन किसी विधि द्वारा स्थापित वित्तीय निगम, अनुसूचित बैंक, उत्तर प्रदेश को-ऑपरेटिव बैंक, जिला सहकारी बैंक अथवा किसी अन्य ग्राम पंचायत से भी ऋण लिया जा सकता है। ऋण का उद्देश्य अधिनियम के किसी उद्देश्य को पूरा करना होना चाहिए।
केवल पंचायत प्रस्ताव से नहीं मिलेगा बैंक ऋण
कानून में ऋण लेने की शक्ति होने का अर्थ यह नहीं है कि ग्राम पंचायत केवल बैठक में प्रस्ताव पारित करके सीधे बैंक से कर्ज ले सकती है। बैंक या वित्तीय संस्था से ऋण लेने के लिए धारा 36 में निर्धारित सक्षम/निर्धारित प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति और लागू शर्तों का पालन आवश्यक है।
इसलिए पंचायत प्रतिनिधियों को किसी भी ऋण समझौते या वित्तीय दायित्व को स्वीकार करने से पहले संबंधित नियमों, शासनादेशों और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति की स्थिति स्पष्ट कर लेनी चाहिए।
किन कार्यों के लिए हो सकता है ऋण का उपयोग?
धारा 36 ऋण को अधिनियम के उद्देश्यों को पूरा करने से जोड़ती है। इसलिए ऋण का उपयोग पंचायत के वैधानिक दायित्वों तथा स्वीकृत विकास कार्यों से संबंधित होना चाहिए।
परियोजना और लागू नियमों के अनुसार ग्रामीण पेयजल, पंचायत भवन, सामुदायिक परिसंपत्तियां, स्वच्छता, ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन, ग्रामीण आधारभूत सुविधाएं, ऊर्जा एवं सौर ऊर्जा जैसी परियोजनाएं संभावित क्षेत्र हो सकते हैं। हालांकि किसी विशेष परियोजना की ऋण पात्रता संबंधित योजना, नियम, शासनादेश और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति पर निर्भर करेगी।
ऋण लेने से पहले पंचायत अपनाए यह प्रक्रिया
पहला चरण—आवश्यकता का निर्धारण:
किस विकास कार्य के लिए ऋण आवश्यक है, इसका स्पष्ट आकलन किया जाए।
दूसरा चरण—ग्राम पंचायत का प्रस्ताव:
परियोजना की लागत, ऋण की आवश्यकता और संभावित पुनर्भुगतान व्यवस्था को प्रस्ताव में शामिल किया जाए।
तीसरा चरण—तकनीकी एवं वित्तीय दस्तावेज:
आवश्यकतानुसार तकनीकी प्राक्कलन, डीपीआर, परियोजना लागत और पंचायत की वित्तीय क्षमता का विवरण तैयार किया जाए।
चौथा चरण—पूर्व स्वीकृति:
बैंक अथवा वित्तीय संस्था से ऋण लेने से पहले धारा 36 के अनुसार निर्धारित प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति प्राप्त की जाए।
पांचवां चरण—बैंक की प्रक्रिया:
स्वीकृति के बाद संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था की ऋण मूल्यांकन एवं दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की जाए।
छठा चरण—राशि का निर्धारित उपयोग:
ऋण से प्राप्त धनराशि का उपयोग केवल स्वीकृत उद्देश्य के लिए किया जाए तथा उसका विधिवत लेखा-जोखा रखा जाए।
ऋण पंचायत की आय नहीं, वित्तीय दायित्व है
ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों को यह समझना होगा कि ऋण पंचायत की आय नहीं बल्कि भविष्य में चुकाया जाने वाला वित्तीय दायित्व है। इसलिए ऋण लेने से पहले ब्याज, पुनर्भुगतान अवधि, किस्त और ऋण चुकाने के वैध स्रोत का वित्तीय आकलन जरूरी है।
किसी बैंक अथवा निजी वित्तीय संस्था से ऋण का प्रस्ताव मिलने पर ग्राम पंचायत को बिना निर्धारित प्राधिकारी की आवश्यक पूर्व स्वीकृति के कोई ऋण समझौता अथवा वित्तीय दायित्व स्वीकार नहीं करना चाहिए।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने किया सावधानी का आह्वान
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने ग्राम प्रधानों, पंचायत प्रतिनिधियों और पंचायत अधिकारियों से अपील की है कि पंचायतों को प्राप्त वित्तीय शक्तियों का उपयोग पूरी पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून के अनुरूप किया जाए।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े विकास कार्यों के लिए पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध होना आवश्यक है। ऋण की वैधानिक व्यवस्था पंचायतों के लिए विकास के अतिरिक्त वित्तीय विकल्प का मार्ग खोलती है, लेकिन इसका उपयोग पूरी वित्तीय सावधानी और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के साथ ही किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी ग्राम पंचायत को ऋण लेने से पहले उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 36, लागू नियमों, शासनादेशों तथा निर्धारित प्राधिकारी की स्वीकृति की स्थिति स्पष्ट कर लेनी चाहिए।
कानून की महत्वपूर्ण धारा
उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 — धारा 36 : Power to Borrow (ऋण लेने की शक्ति)
उत्तर प्रदेश पंचायती राज विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर पंचायत राज अधिनियम, 1947 उपलब्ध है और अधिनियम की धारा 36 में ग्राम पंचायत की ऋण लेने की शक्ति का प्रावधान दर्ज है।
“सशक्त पंचायत के लिए वित्तीय अधिकार जरूरी हैं, लेकिन हर वित्तीय निर्णय कानून, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना चाहिए।”
