3 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का लक्ष्य—ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने अभियान को बताया महिला आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
लखनऊ। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने की दिशा में स्वयं सहायता समूह (SHG) ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्त माध्यम के रूप में उभर रहे हैं। ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने कहा कि महिलाओं को संगठित कर उन्हें रोजगार, स्वरोजगार और आजीविका के अवसरों से जोड़ना ग्रामीण विकास की मजबूत आधारशिला है।
प्रदेश में 3 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने के संकल्प के साथ अभियान आगे बढ़ रहा है। अब तक 10.10 लाख स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है, जिनसे 1.19 करोड़ परिवार जुड़ चुके हैं। यह उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं की सामूहिक शक्ति, मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास को दर्शाती है।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि स्वयं सहायता समूह केवल आर्थिक गतिविधियों का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये ग्रामीण महिलाओं को निर्णय लेने, बचत करने, स्वरोजगार अपनाने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं। पंचायत स्तर पर SHG गतिविधियों को प्रोत्साहित कर गांवों में स्थानीय रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास की योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी व्यापक स्तर तक पहुंचेगा, जब महिलाओं की भागीदारी को केंद्र में रखते हुए पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
संगठन ने ग्रामीण महिलाओं से आह्वान किया कि वे स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर सामूहिक बचत, स्वरोजगार, कौशल विकास और आजीविका के अवसरों का लाभ उठाएं। एक सशक्त महिला, सशक्त परिवार और सशक्त गांव की आधारशिला बन सकती है।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने कहा कि महिला आर्थिक सशक्तीकरण को ग्राम पंचायतों के विकास एजेंडे से जोड़कर ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।
