जांच लंबित है या रिकवरी के आदेश हो चुके हैं तो गंभीरता से लें मामला; ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने पंचायत प्रतिनिधियों से की नियमानुसार शीघ्र निस्तारण की अपील
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों में वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही और जनधन के सही उपयोग को लेकर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने पंचायत प्रतिनिधियों को महत्वपूर्ण चेतावनी एवं अपील जारी की है।

संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि जिन ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित जांच लंबित है अथवा किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा रिकवरी/वसूली के आदेश पारित किए जा चुके हैं, वहां संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों को मामले को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार अपना पक्ष रखने तथा वैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से प्रकरण का समय रहते निस्तारण कराने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंचायत की एक-एक पाई जनता के विकास की अमानत है। वित्तीय मामलों में लापरवाही, अनियमितता या सरकारी धन की वसूली से जुड़े प्रकरणों को लंबित रखना पंचायत प्रतिनिधियों के लिए आगे चलकर गंभीर प्रशासनिक एवं कानूनी परिणाम पैदा कर सकता है।
“आज निस्तारण का प्रयास करें, कल पछताने की नौबत न आए”
विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों को यह नहीं सोचना चाहिए कि जांच या रिकवरी की कार्रवाई केवल वर्तमान कार्यकाल तक सीमित है। यदि किसी प्रकरण में कानून एवं नियमों के तहत कोई देयता, दोष या आदेश निर्धारित होता है, तो उसका प्रभाव संबंधित व्यक्ति की आगे की पात्रता अथवा चुनावी प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपील करते हुए कहा—
“यदि आपके विरुद्ध कोई वित्तीय जांच चल रही है या रिकवरी का आदेश हुआ है, तो उसे नजरअंदाज न करें। संबंधित विभाग के समक्ष अपना पक्ष रखें, अभिलेख प्रस्तुत करें और नियमानुसार प्रकरण का निस्तारण कराएं। चुनावी भविष्य सुरक्षित रखने का सबसे बेहतर रास्ता पारदर्शिता और कानून का पालन है।”
संगठन की दो टूक—पंचायत में पारदर्शिता सर्वोपरि
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की सबसे पहली और महत्वपूर्ण इकाई हैं। यहां होने वाला प्रत्येक वित्तीय लेन-देन पारदर्शी, नियमसम्मत और जनहित में होना चाहिए।
संगठन ने पंचायत प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे—
- लंबित वित्तीय जांचों को गंभीरता से लें।
- रिकवरी/वसूली के आदेशों की स्थिति स्पष्ट कराएं।
- संबंधित अधिकारियों के समक्ष समय से अपना पक्ष रखें।
- आवश्यक अभिलेख एवं प्रमाण प्रस्तुत करें।
- सरकारी धन की देनदारी होने पर नियमानुसार उसका निस्तारण करें।
- पंचायत के वित्तीय अभिलेखों को व्यवस्थित एवं पारदर्शी रखें।
- भविष्य में किसी भी वित्तीय अनियमितता से बचने के लिए नियमों का पालन करें।
अयोग्यता के संबंध में महत्वपूर्ण सावधानी
संगठन ने स्पष्ट किया कि सिर्फ जांच लंबित होने को स्वतः चुनावी अयोग्यता मानना उचित नहीं है। किसी व्यक्ति की चुनाव लड़ने की पात्रता/अयोग्यता संबंधित कानून, अंतिम आदेश और निर्वाचन नियमों के अनुसार निर्धारित होती है। उत्तर प्रदेश में पंचायत निर्वाचन राज्य निर्वाचन आयोग के अधीन संचालित होते हैं और पंचायत निर्वाचन से संबंधित कार्यवाही प्रचलित कानूनों एवं नियमों के अनुसार होती है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने स्पष्ट रूप से कहा कि “पंचायत प्रतिनिधि पद केवल अधिकार नहीं, बल्कि जनता के प्रति संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। वित्तीय मामलों में पारदर्शिता ही सम्मान और राजनीतिक भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। जिन प्रतिनिधियों के मामले जांच या रिकवरी की प्रक्रिया में हैं, वे समय रहते नियमानुसार समाधान की दिशा में कदम उठाएं।”
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी प्रतिनिधि को भयभीत करना नहीं, बल्कि पंचायतों में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और स्वच्छ पंचायतीराज व्यवस्था को मजबूत करना है।
“पंचायत का धन जनता का धन है, इसकी पाई-पाई का हिसाब जरूरी है।”
