ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने फैसले का किया स्वागत, पंचायतों को त्वरित कार्रवाई का मिलेगा आधार

लखनऊ। ग्राम पंचायतों की जमीन पर अतिक्रमण हटाने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले का ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने स्वागत किया है। समाचार के अनुसार हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत पारित बेदखली आदेश को लागू करने के लिए लंबी और पेचीदा प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं है तथा आवश्यकता पड़ने पर बेदखली के लिए जरूरी बल का प्रयोग भी किया जा सकता है।
संगठन का मानना है कि ग्राम पंचायतों की भूमि सार्वजनिक उपयोग और ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण है। पंचायत की जमीन पर अवैध कब्जे होने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं और ग्रामीणों के हितों को भी नुकसान पहुंचता है। ऐसे मामलों में समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित होना आवश्यक है।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि हाईकोर्ट का यह निर्णय ग्राम पंचायतों के अधिकारों और सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पंचायतों की भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में अनावश्यक देरी समाप्त होनी चाहिए और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को कानून के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की संपत्ति केवल राजस्व अभिलेखों का हिस्सा नहीं, बल्कि ग्रामीण जनता की साझा संपत्ति है।इस पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा पंचायत के विकास और ग्रामीणों के अधिकारों के विरुद्ध है। संगठन पंचायतों के अधिकारों की रक्षा और अतिक्रमण मुक्त ग्राम पंचायतों के लिए निरंतर आवाज उठाता रहेगा।
संगठन ने सरकार एवं प्रशासन से मांग की कि हाईकोर्ट के निर्णय की भावना के अनुरूप ग्राम पंचायतों की भूमि से जुड़े अतिक्रमण मामलों में पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि पंचायतों की संपत्ति का उपयोग जनहित एवं विकास कार्यों में किया जा सके।
