गांवों की संस्कृति, परंपरा, हस्तशिल्प और प्राकृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं — विवेक चन्द्र अवस्थी
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कानपुर। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर ग्रामीण सत्ता पंचायती राज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा देने तथा ग्राम पंचायतों को ग्रामीण एवं स्थानीय पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भारत के गांवों में लोक संस्कृति, परंपराएं, ऐतिहासिक स्थल, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर, तालाब, प्राकृतिक स्थल, कृषि आधारित जीवनशैली, स्थानीय व्यंजन और हस्तशिल्प जैसी अनेक विशिष्टताएं मौजूद हैं। यदि इन संसाधनों को सुव्यवस्थित तरीके से पर्यटन से जोड़ा जाए तो गांवों में स्थानीय रोजगार, स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि ग्राम पंचायतें स्थानीय पर्यटन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। पंचायत स्तर पर पर्यटन स्थलों की पहचान, स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, संपर्क मार्ग, सूचना पट्ट, सामुदायिक सुविधाओं तथा स्थानीय उत्पादों के प्रचार-प्रसार की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ‘एक ग्राम पंचायत–एक स्थानीय पर्यटन पहचान’ की अवधारणा के आधार पर प्रत्येक पंचायत अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, धार्मिक अथवा प्राकृतिक पहचान को विकसित कर सकती है। इससे ग्रामीण युवाओं, स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों, महिला समूहों तथा स्थानीय उद्यमियों को भी नए अवसर मिल सकते हैं।
संगठन की ओर से यह भी कहा गया कि ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देते समय स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण और ग्राम समुदाय की भागीदारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पर्यटन विकास ऐसा हो जिससे गांव की मौलिक पहचान सुरक्षित रहे और उसका लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचे।
ग्रामीण सत्ता पंचायती राज संगठन ने विश्व पर्यटन दिवस पर देश की सभी ग्राम पंचायतों से अपने क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं का स्थानीय स्तर पर चिन्हांकन करने तथा ग्रामीण पर्यटन को पंचायत विकास की व्यापक योजना से जोड़ने का आह्वान किया।
