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पुण्यतिथि विशेष लेख — मेरी कलम से……
रूढ़ियों के विरुद्ध संघर्ष और शिक्षा के प्रसार से उन्होंने भारतीय समाज में नई जागृति का मार्ग प्रशस्त किया — विवेक चन्द्र अवस्थी
कानपुर। भारतीय सामाजिक सुधार आंदोलन के इतिहास में राजा राममोहन राय का नाम उन महान व्यक्तित्वों में लिया जाता है, जिन्होंने सामाजिक कुरीतियों और रूढ़िवादी प्रथाओं के विरुद्ध आवाज उठाते हुए आधुनिक एवं प्रगतिशील भारत की नींव मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी पुण्यतिथि पर उनका जीवन, संघर्ष और सामाजिक सुधारों के प्रति समर्पण आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

राजा राममोहन राय का जन्म 22 मई 1772 को बंगाल के राधानगर में हुआ था। उन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त अनेक सामाजिक समस्याओं को समझने और उनके सुधार के लिए निरंतर प्रयास किया। विशेष रूप से सती प्रथा के विरोध में उनका संघर्ष ऐतिहासिक रहा। उनके प्रयासों और व्यापक सामाजिक विमर्श ने सती प्रथा के उन्मूलन के लिए वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1829 में तत्कालीन गवर्नर-जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिंक के शासनकाल में सती प्रथा पर कानूनी प्रतिबंध लगाया गया।
महिला सम्मान और शिक्षा के समर्थक
राजा राममोहन राय महिलाओं की गरिमा और अधिकारों के प्रबल समर्थक थे। वे महिलाओं की शिक्षा तथा समाज में उनके सम्मानजनक स्थान के पक्षधर रहे। उनका मानना था कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब महिलाओं को शिक्षा और समान मानवीय सम्मान प्राप्त हो।
शिक्षा और विचारों की स्वतंत्रता पर जोर
उन्होंने आधुनिक शिक्षा, तर्कशील सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने पर बल दिया। वे भारतीय समाज में ऐसी शिक्षा व्यवस्था के समर्थक थे, जो लोगों को ज्ञान के साथ-साथ स्वतंत्र चिंतन की क्षमता भी प्रदान करे। उन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से भी सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता को आगे बढ़ाया।
राजा राममोहन राय ने 1828 में ब्रह्म सभा की स्थापना की, जो आगे चलकर ब्रह्म समाज के रूप में विकसित हुई। इसका उद्देश्य धार्मिक एवं सामाजिक सुधार, एकेश्वरवाद तथा तर्कपूर्ण चिंतन को बढ़ावा देना था।
आज भी प्रासंगिक है उनकी विरासत
विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि, “राजा राममोहन राय का जीवन हमें यह संदेश देता है कि सामाजिक परिवर्तन केवल विचारों से नहीं, बल्कि साहस, तर्क, शिक्षा और निरंतर प्रयास से संभव होता है। उन्होंने महिलाओं के सम्मान, शिक्षा और सामाजिक सुधार के लिए जो आवाज उठाई, उसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।”
उन्होंने कहा कि राजा राममोहन राय की पुण्यतिथि पर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि समाज से भेदभाव और कुरीतियों को दूर करने, शिक्षा को बढ़ावा देने तथा महिलाओं और बालिकाओं के सम्मान एवं अधिकारों के प्रति निरंतर जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया जाए।
राजा राममोहन राय का जीवन भारतीय समाज में नवजागरण, सुधार और तर्कशील चेतना की ऐसी विरासत है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी सामाजिक परिवर्तन के लिए प्रेरित करती रहेगी।
