निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही बनाया जाए प्रशासक : विवेक चन्द्र अवस्थी
लखनऊ। वर्तमान परिस्थितियों में निवर्तमान ग्राम प्रधानों के समक्ष एक महत्वपूर्ण चुनौती खड़ी हो गई है। प्रशासकों का कार्यकाल अक्टूबर-नवंबर में समाप्त होने के मद्देनजर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने शासन से प्रशासकों की पुनरावृत्ति में निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्राथमिकता दिए जाने की मांग की है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से आपसी मतभेद और आरोप-प्रत्यारोप भुलाकर इस मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया।
विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों से ब्लॉक एवं जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा शासन को ग्राम प्रधानों के पंचायत कार्यों में अपेक्षित सहयोग नहीं करने संबंधी आख्या दिए जाने की चर्चा है। ऐसी स्थिति में यदि शासकीय कर्मचारियों को प्रशासक बनाया गया तो इसका सीधा प्रभाव पंचायती राज व्यवस्था और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि पंचायतों में विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए अनुभवी निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। पंचायतों की स्थानीय परिस्थितियों, आवश्यकताओं और विकास कार्यों की जानकारी रखने वाले निवर्तमान प्रधान प्रशासन और विकास कार्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सकते हैं।
जांच लंबित होने मात्र से न किया जाए वंचित
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह भी मांग उठाई कि जिन निवर्तमान ग्राम प्रधानों के विरुद्ध विभागीय जांच प्रक्रिया चल रही है, उन्हें केवल जांच लंबित होने के आधार पर प्रशासक बनाए जाने से वंचित न किया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक किसी व्यक्ति के विरुद्ध आरोप सिद्ध नहीं होते, तब तक केवल जांच लंबित होने को आधार बनाकर उसे जिम्मेदारी से दूर रखना उचित नहीं होगा।
विकास कार्यों की निरंतरता जरूरी
अवस्थी ने कहा कि वर्तमान समय में पंचायतों की कार्ययोजनाओं की फीडिंग शासन के निर्देशानुसार चल रही है। नवंबर में संभावित आचार संहिता को देखते हुए पंचायतों में प्रशासनिक बदलाव होने पर विकास कार्यों की गति प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने से पंचायतों के कार्यों में निरंतरता बनी रह सकती है।
उन्होंने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायतों के विकास के लिए सरकार द्वारा बड़ी धनराशि निर्धारित किए जाने की स्थिति में यह और अधिक जरूरी हो जाता है कि पंचायतों की जिम्मेदारी ऐसे अनुभवी लोगों को मिले, जो स्थानीय आवश्यकताओं और विकास कार्यों की व्यावहारिक जानकारी रखते हों।
जनप्रतिनिधियों से सदन में आवाज उठाने की अपील
विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध लड़ाई नहीं, बल्कि पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकार, सम्मान और पंचायत व्यवस्था की निरंतरता का विषय है। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने अमूल्य मत से विधान परिषद सदस्यों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों को अपना प्रतिनिधि चुना है। ऐसे में सबसे पहले लोकतांत्रिक तरीके से उन्हीं के समक्ष अपनी मांग रखी जानी चाहिए।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे पंचायत प्रतिनिधियों की आवाज को सदन में मजबूती से उठाएं और शासन के समक्ष निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने में प्राथमिकता दिए जाने की मांग रखें।
अवस्थी ने कहा कि सभी पंचायत प्रतिनिधियों को व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए।
“एक मांग, एक आवाज—प्रशासक की पुनरावृत्ति में निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्राथमिकता मिले।”
