जन्मदिवस विशेष
लखनऊ। ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने अपने जन्मदिवस के अवसर पर देश-विदेश से प्राप्त शुभकामनाओं के लिए सभी शुभचिंतकों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, संगठन के पदाधिकारियों, सहयोगियों एवं नागरिकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जन्मदिन केवल आयु का एक और वर्ष पूर्ण होने का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन, कृतज्ञता और समाज के प्रति अपने दायित्वों को नए संकल्प के साथ आगे बढ़ाने का पावन क्षण है।
उन्होंने कहा कि जीवन की इस यात्रा में उन्हें जो सम्मान, स्नेह और विश्वास प्राप्त हुआ है, वह किसी पद, प्रतिष्ठा या उपलब्धि का नहीं, बल्कि समाज के प्रेम और आशीर्वाद का अमूल्य प्रतिफल है। “आप सभी का विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूँजी है और यही विश्वास मुझे जनसेवा के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।”
विवेक चन्द्र अवस्थी ने अपने पूज्य माता-पिता को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि उनके संस्कारों ने उन्हें सत्य, सेवा और संघर्ष का मार्ग दिखाया। उन्होंने अपने गुरुजनों, वरिष्ठजनों तथा सभी शुभचिंतकों के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि उनके व्यक्तित्व में कोई अच्छाई है तो वह इन्हीं के मार्गदर्शन, आशीर्वाद और विश्वास का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य की वास्तविक पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, संवेदनशीलता, सेवा और लोगों के हृदय में अर्जित विश्वास से होती है। यदि उनके प्रयासों से किसी पीड़ित को सहारा मिला हो, किसी निराश व्यक्ति को आशा मिली हो, किसी परिवार के जीवन में मुस्कान लौटी हो अथवा किसी गाँव के विकास को नई दिशा मिली हो, तो यही उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन केवल एक संगठन नहीं, बल्कि सशक्त गाँव–समृद्ध भारत के संकल्प का राष्ट्रीय अभियान है। जब तक देश का अंतिम गाँव विकास, सम्मान और अवसरों की मुख्यधारा से पूर्ण रूप से नहीं जुड़ जाता, तब तक उनका संघर्ष और समर्पण निरंतर जारी रहेगा।
अपने जन्मदिवस पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक शुभकामना उनके लिए केवल बधाई नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को और अधिक निष्ठा, ईमानदारी तथा समर्पण के साथ निभाने की प्रेरणा है। उन्होंने सभी शुभचिंतकों से समाज में प्रेम, सद्भाव, सहयोग और मानवीय मूल्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
अंत में विवेक चन्द्र अवस्थी ने भावुक स्वर में कहा, “आज मेरा जन्मदिवस है, लेकिन यह दिन मेरा नहीं है। यह उन सभी लोगों का है, जिन्होंने मुझे अपना विश्वास दिया, अपना स्नेह दिया और हर कठिन मोड़ पर मेरा हाथ थामकर मुझे आगे बढ़ने का साहस दिया। मैं जीवनभर इस विश्वास की मर्यादा बनाए रखने का प्रयास करता रहूँगा।”
उन्होंने कहा कि “आप सभी का स्नेह, आशीर्वाद और विश्वास ही मेरे जीवन का सबसे अनमोल उपहार है। ईश्वर से मेरी यही प्रार्थना है कि जीवन का प्रत्येक श्वास समाज, गाँव और राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित रहे।”
