31 जुलाई, पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि संदेश
शहीद-ए-आज़म सरदार उधम सिंह की पुण्यतिथि पर मैं उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। उनका जीवन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जिसने सम्पूर्ण विश्व को यह संदेश दिया कि भारत अन्याय, अत्याचार और दमन के सामने कभी झुकने वाला राष्ट्र नहीं है। उनका अद्वितीय साहस, अटूट संकल्प और राष्ट्रभक्ति आज भी प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का अमर स्रोत है।

13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग नरसंहार में हजारों निहत्थे भारतीयों पर ब्रिटिश शासन द्वारा बरपाए गए अमानवीय अत्याचार ने पूरे देश की आत्मा को झकझोर दिया था। उस भीषण त्रासदी के प्रत्यक्षदर्शी रहे सरदार उधम सिंह ने उसी दिन संकल्प लिया कि निर्दोष भारतीयों के रक्त का न्याय अवश्य होगा। लगभग 21 वर्षों तक उन्होंने धैर्य, साहस और अदम्य इच्छाशक्ति के साथ उस संकल्प को अपने हृदय में जीवित रखा।
13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में उन्होंने पंजाब के तत्कालीन पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ’ड्वायर को गोली मारकर जलियांवाला बाग नरसंहार के दोषियों को न्याय के कठघरे में खड़ा कर दिया। यह केवल एक व्यक्ति के विरुद्ध प्रतिशोध नहीं था, बल्कि करोड़ों भारतीयों के आत्मसम्मान, न्याय और स्वतंत्रता की भावना का उद्घोष था। गिरफ्तारी के बाद भी उन्होंने निर्भीक होकर अपने कृत्य को राष्ट्र के सम्मान का प्रतीक बताया और 31 जुलाई 1940 को लंदन की पेंटनविल जेल में हँसते-हँसते फाँसी के फंदे को चूमकर मातृभूमि पर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनका यह बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है।
सरदार उधम सिंह केवल एक महान क्रांतिकारी ही नहीं थे, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता के भी अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने अपना नाम “राम मोहम्मद सिंह आज़ाद” रखकर यह संदेश दिया कि भारत की शक्ति उसकी विविधता, सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता में निहित है। उनका यह विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है और हमें एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को सशक्त करने की प्रेरणा देता है।
आज जब भारत विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में अमृतकाल का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है, तब आवश्यकता है कि देश का युवा वर्ग सरदार उधम सिंह जैसे महान क्रांतिकारियों के जीवन से प्रेरणा लेकर ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाए। देशभक्ति केवल सीमाओं पर शौर्य दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा, सामाजिक समरसता, जनसेवा, संविधान के प्रति सम्मान तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय सहभागिता भी सच्ची राष्ट्रसेवा का ही स्वरूप है।
हम सभी का दायित्व है कि स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों के भारत के निर्माण के लिए समाज में एकता, सद्भाव, सेवा, सुशासन और सकारात्मक परिवर्तन का वातावरण तैयार करें। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी और यही उनके बलिदान का वास्तविक सम्मान भी होगा।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन की ओर से शहीद-ए-आज़म सरदार उधम सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि। राष्ट्र उनके अमर बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा और आने वाली पीढ़ियाँ उनके अदम्य साहस, त्याग, राष्ट्रप्रेम तथा न्याय के प्रति अटूट समर्पण से निरंतर प्रेरणा प्राप्त करती रहेंगी।
