“सशक्त महिलाएँ ही समृद्ध गाँव और विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं। जब नारी आगे बढ़ती है, तब परिवार, समाज और पूरा राष्ट्र प्रगति के नए आयाम स्थापित करता है।” — विवेक चन्द्र अवस्थी
लखनऊ। ग्रामीण भारत की बदलती तस्वीर में महिलाएँ अब केवल परिवार की आधारशिला नहीं, बल्कि विकास की अग्रदूत के रूप में अपनी सशक्त पहचान स्थापित कर रही हैं। विभिन्न सरकारी योजनाओं और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से ग्रामीण महिलाएँ आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन की भी मजबूत वाहक बनकर उभरी हैं।
आज बैंक सखी, बीमा सखी, उद्यम सखी, कृषि आजीविका सखी, विद्युत सखी, बीसी सखी और ड्रोन सखी जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन करते हुए महिलाएँ गाँव-गाँव तक वित्तीय समावेशन, आधुनिक कृषि तकनीक, स्वरोज़गार, डिजिटल सेवाओं, बीमा सुरक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचा रही हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने के साथ महिलाओं के आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इन पहलों के माध्यम से महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने, ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने, डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने, किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक पहुँचाने तथा सरकारी सेवाओं की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विशेष रूप से ड्रोन सखी आधुनिक कृषि में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देकर खेती को अधिक वैज्ञानिक, सुरक्षित और लाभकारी बनाने की दिशा में नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण ही आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएँ आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी रूप से सक्षम होती हैं, तब गाँव केवल विकास नहीं करता, बल्कि आत्मविश्वास, समृद्धि और नवाचार की नई ऊँचाइयों को भी प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी समन्वय से महिलाओं को नेतृत्व के अधिक अवसर उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय स्वशासन दोनों को नई मजबूती मिलेगी।
