
कानपुर। देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला गांवों को माना जाता है तथा ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी त्रिस्तरीय पंचायतीराज व्यवस्था—ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत—पर आधारित है। इसी उद्देश्य को सशक्त बनाने के लिए “ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन” देशभर के पंचायत प्रतिनिधियों को एक संगठित एवं प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है।
संगठन का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को एकजुट कर उन्हें प्रशासनिक, सामाजिक एवं विकासात्मक कार्यों में अधिक सक्षम बनाना है। संगठन ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, जिला पंचायत सदस्यों एवं पंचायत व्यवस्था से जुड़े जनप्रतिनिधियों को एक साझा मंच प्रदान करता है, जिससे उनके अनुभवों, सुझावों एवं समस्याओं का समुचित समाधान किया जा सके।
संगठन द्वारा पंचायत प्रतिनिधियों को उनके अधिकारों एवं दायित्वों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं एवं नेतृत्व विकास सत्र आयोजित किए जाते हैं। इसके माध्यम से जनप्रतिनिधियों को सरकारी योजनाओं, प्रशासनिक प्रक्रियाओं एवं ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
संगठन का मानना है कि पंचायतों को सशक्त किए बिना ग्रामीण भारत के समग्र विकास की कल्पना संभव नहीं है। इसी दृष्टिकोण के साथ पंचायत सशक्तिकरण, पारदर्शिता, जवाबदेही, सामाजिक समावेशन तथा ग्रामीण विकास के विभिन्न आयामों पर निरंतर कार्य किया जा रहा है।
संगठन पंचायत प्रतिनिधियों एवं शासन-प्रशासन के बीच एक सेतु के रूप में भी कार्य करता है। जनप्रतिनिधियों की समस्याओं, सुझावों एवं मांगों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने के साथ-साथ पंचायतों की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि गांवों का विकास ही राष्ट्र के विकास की वास्तविक आधारशिला है। यदि पंचायतें सशक्त होंगी तो शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वच्छता एवं आधारभूत सुविधाओं का विस्तार स्वतः संभव होगा।
संगठन ने देशभर के पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीण विकास के प्रति समर्पित नागरिकों से इस राष्ट्रीय अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है, जिससे पंचायतों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती प्रदान की जा सके।
संगठन का मूल मंत्र “सशक्त संगठन – सशक्त पंचायत – सतत विकास” तथा “गांव की शक्ति – राष्ट्र की प्रगति” है, जिसके माध्यम से ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, स्वावलंबी एवं विकसित बनाने का संकल्प लिया गया है।
