ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन की ओर से विशेष खबर
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से वित्तीय सहायता की व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। रिवॉल्विंग फंड और सामुदायिक निवेश निधि जैसी सहायता से महिलाओं को स्वरोजगार, छोटे उद्यम और आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रावधानों के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों को शुरुआती तीन महीनों में ₹30,000 तक की रिवॉल्विंग फंड सहायता, छह महीने बाद ₹1,50,000 तक की सामुदायिक निवेश निधि सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। आवश्यकता के समय ₹5,000 तक तत्काल सहायता तथा बैंक ऋण की सुविधा भी महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सहयोग प्रदान करती है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा
“महिला सशक्तिकरण केवल आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि महिलाओं को स्थायी रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम हैं। यदि प्रत्येक गाँव में महिला समूहों को समय पर वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, बाजार और बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ा जाए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है। हमारा संकल्प है कि पंचायतों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली प्रत्येक सकारात्मक पहल को प्रोत्साहित किया जाए।”
उन्होंने कहा कि मजबूत स्वयं सहायता समूह न केवल महिलाओं की आय बढ़ाने में सहायक हैं, बल्कि परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने और गाँवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन का मानना है कि आर्थिक रूप से सशक्त महिला ही सशक्त परिवार और सशक्त गाँव की आधारशिला है।
सशक्त समूह • आत्मनिर्भर महिलाएँ • समृद्ध गाँव • मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था
