आगे भी प्रशासक बने रहेंगे प्रधान-विवेक चन्द्र अवस्थी
25 नवंबर को समाप्त हो रही छह माह की अवधि, शासन को भेजा कार्यकाल विस्तार का प्रस्ताव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों के निर्वाचित ग्राम प्रधानों का बतौर प्रशासक छह माह का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में पंचायतीराज विभाग द्वारा ग्राम प्रधानों का प्रशासक के रूप में कार्यकाल आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
गौरतलब है कि प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों को 26 मई 2026 को प्रशासक के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्हें आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संपन्न होने तक छह माह के लिए प्रशासकीय जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब निर्धारित अवधि समाप्त होने से पहले कार्यकाल विस्तार को लेकर शासन स्तर पर विचार-विमर्श की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

हाईकोर्ट ने तीन माह में पंचायत चुनाव कराने का दिया था आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गत 14 अक्टूबर को पंचायत चुनाव से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार एवं राज्य निर्वाचन आयोग को तीन माह के भीतर पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। दूसरी ओर, पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण के संबंध में रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है। ऐसे में पंचायत चुनाव की समय-सारिणी और आरक्षण निर्धारण को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है।
बिना OBC आरक्षण तय किए पंचायत चुनाव कराना उचित नहीं : ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने पहले ही स्पष्ट किया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग के संवैधानिक एवं वैधानिक आरक्षण की प्रक्रिया पूरी किए बिना पंचायत चुनाव कराना उचित नहीं होगा। संगठन का मानना है कि पंचायत चुनाव में सामाजिक न्याय, संवैधानिक व्यवस्था और सभी वर्गों की समुचित भागीदारी सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि,
“ग्राम पंचायतें लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण एवं बुनियादी इकाई हैं। ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी सौंपकर ग्रामीण विकास एवं पंचायतों के कामकाज को निरंतर जारी रखने का प्रयास किया गया है। यदि पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर संपन्न नहीं हो पाते हैं तो शासन को ऐसा निर्णय लेना चाहिए, जिससे ग्राम पंचायतों का प्रशासनिक एवं विकास कार्य प्रभावित न हो।
संगठन की स्पष्ट मांग है कि पंचायत चुनाव कराने से पहले अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का संवैधानिक एवं कानूनी आधार पर निर्धारण किया जाए। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही आरक्षण की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाई जाए।
पंचायत चुनाव केवल एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि ग्रामीण लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और सत्ता के विकेंद्रीकरण का आधार हैं। इसलिए किसी भी वर्ग के अधिकारों की अनदेखी किए बिना निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव कराना आवश्यक है।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन प्रदेश सरकार से मांग करता है कि ग्राम प्रधानों के प्रशासकीय कार्यकाल, पंचायतों के सुचारु संचालन और OBC आरक्षण के मुद्दे पर समय रहते स्पष्ट निर्णय लिया जाए, ताकि ग्रामीण विकास की गति बाधित न हो और लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत बनी रहे।”
