मेरी कलम से — विवेक चन्द्र अवस्थी
राष्ट्रीय अध्यक्ष
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन
माँ कूष्मांडा की आराधना से जीवन में हो ऊर्जा, उत्साह, सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का संचार
माँ कूष्मांडा के दिव्य आशीर्वाद से प्रकाशित हो जीवन का हर अंधकार, जागृत हो आत्मविश्वास और सशक्त बने समाज।
॥ ॐ ऐं ह्रीं देव्यै नमः ॥
वन्दे वाञ्छितकामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम्॥
॥ ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः ॥

शारदीय नवरात्रि के चतुर्थ दिवस पर आदिशक्ति माँ दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप माँ कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से सृष्टि में प्रकाश और ऊर्जा का संचार किया। उन्हें सृजन, ऊर्जा, आरोग्य और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
माँ कूष्मांडा का दिव्य स्वरूप हमें यह संदेश देता है कि जीवन में परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, सकारात्मक सोच, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के बल पर नई संभावनाओं के द्वार खोले जा सकते हैं। निराशा के अंधकार में भी आशा का दीप प्रज्वलित करना और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना ही जीवन की वास्तविक शक्ति है।

नवरात्रि केवल पूजा-अर्चना और व्रत का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और सकारात्मक परिवर्तन का पावन अवसर भी है। माँ कूष्मांडा की आराधना हमें सिखाती है कि वास्तविक शक्ति केवल सामर्थ्य में नहीं, बल्कि करुणा, धैर्य, सेवा और सृजनशीलता में निहित है। जब हमारे विचार पवित्र, कर्म ईमानदार और उद्देश्य जनकल्याणकारी होते हैं, तब हम अपने जीवन के साथ-साथ समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
माँ दुर्गा के प्रत्येक स्वरूप में नारी की शक्ति, गरिमा और सृजनशीलता का दर्शन होता है। माँ कूष्मांडा का यह पावन दिवस हमें संकल्प लेने की प्रेरणा देता है कि प्रत्येक बेटी और महिला को शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान तथा समान अवसर प्राप्त हों। नारी का सम्मान केवल हमारे संस्कारों का परिचायक नहीं, बल्कि सशक्त, समतामूलक एवं विकसित समाज की पहचान भी है।
ग्रामीण भारत की वास्तविक शक्ति उसके गाँवों में बसती है। ग्राम पंचायतें लोकतंत्र की आधारशिला हैं, जहाँ जनभागीदारी, सामाजिक न्याय और विकास की योजनाएँ धरातल पर साकार होती हैं। इस पावन अवसर पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने गाँवों को स्वच्छ, शिक्षित, स्वस्थ, पर्यावरण-अनुकूल और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे। जरूरतमंदों की सहायता करना, महिलाओं का सशक्तीकरण, युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना तथा समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाना ही सच्ची जनसेवा है।
आइए, माँ कूष्मांडा के आशीर्वाद से ऐसे ग्रामीण भारत के निर्माण का संकल्प लें, जहाँ विकास के साथ मानवीय संवेदना, समृद्धि के साथ सामाजिक न्याय और अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी सम्मान हो। हमारा प्रत्येक प्रयास गाँवों को सशक्त बनाने, पंचायतों को आत्मनिर्भर करने और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने वाला हो।
हे माँ कूष्मांडा! आपकी कृपा से प्रत्येक घर में सुख-शांति, प्रत्येक परिवार में समृद्धि, प्रत्येक बेटी के जीवन में सुरक्षा एवं सम्मान और प्रत्येक गाँव में विकास का प्रकाश फैले। हमारे मन से निराशा, समाज से भेदभाव तथा राष्ट्र से अशिक्षा और अभाव का अंधकार दूर हो। हमें सद्बुद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, सेवा-भाव और राष्ट्रनिर्माण के मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें।
माँ कूष्मांडा के श्रीचरणों में कोटि-कोटि नमन।
शारदीय नवरात्रि के चतुर्थ दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। माँ जगदंबा की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे और जीवन सुख, शांति, समृद्धि एवं सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण हो।
जय माता दी! जय माँ कूष्मांडा!
“सकारात्मक विचार, समर्पित कर्म और जनसेवा का संकल्प ही सशक्त समाज एवं समृद्ध राष्ट्र की सच्ची आधारशिला है।”
