“पितृ पक्ष हमारी जड़ों, संस्कारों और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का पावन पर्व है” — विवेक चन्द्र अवस्थी

कानपुर। भारतीय संस्कृति में परिवार, परंपरा और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का विशेष स्थान है। पितृ पक्ष इसी श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण की हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है। यह अवसर हमें अपने उन पूर्वजों को नमन करने की प्रेरणा देता है, जिनके त्याग, संघर्ष, संस्कार और जीवन मूल्यों ने हमारी वर्तमान पीढ़ियों की नींव मजबूत की।

ग्रामीण सत्ता पंचायती राज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा, “पितृ पक्ष केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन करने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, परिवार और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन समय है। हमारे पूर्वजों ने जिन संस्कारों, आदर्शों और जीवन मूल्यों की विरासत हमें सौंपी है, उन्हें सुरक्षित रखना और अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।”
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच ऐसे पर्व हमें अपने परिवार और समाज की मूल भावना से जोड़ते हैं। पूर्वजों का स्मरण हमें यह भी याद दिलाता है कि वर्तमान उपलब्धियों के पीछे अनेक पीढ़ियों का संघर्ष, परिश्रम और त्याग जुड़ा हुआ है।
पूर्वजों के संस्कार ही हमारी वास्तविक विरासत
विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि संपत्ति और भौतिक संसाधनों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण वह संस्कार और जीवन-दृष्टि है, जो हमें अपने पूर्वजों से प्राप्त होती है। सत्य, सेवा, सदाचार, परिश्रम, करुणा और समाज के प्रति उत्तरदायित्व जैसे मूल्य पीढ़ी-दर-पीढ़ी समाज को मजबूत बनाते हैं।
पितृ पक्ष के अवसर पर हमें अपने दिवंगत परिजनों एवं पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। साथ ही जरूरतमंदों की सहायता, अन्नदान और सेवा जैसे मानवीय कार्यों के माध्यम से समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पूर्वजों का सम्मान केवल स्मरण तक सीमित न रहकर उनके श्रेष्ठ संस्कारों को अपने आचरण में उतारने से सार्थक होता है।
पितरों के आशीर्वाद की कामना
ग्रामीण सत्ता पंचायती राज संगठन की ओर से पितृ पक्ष के अवसर पर समस्त पितरों को सादर नमन करते हुए विवेक चन्द्र अवस्थी ने प्रभु श्रीराम जी से प्रार्थना की कि सभी परिवारों पर पितरों की कृपा और आशीर्वाद बना रहे तथा प्रत्येक परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और सद्भाव कायम रहे।
उन्होंने सभी से इस पावन अवसर को श्रद्धा, संयम और सेवा भावना के साथ मनाने तथा अपनी आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने का आह्वान किया।
