Paperless Panchayat 2030: 15 अगस्त को ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने डिजिटल पंचायत (Digital Panchayat) अभियान को दिया नया विस्तार
1,26,972 सदस्य बने डिजिटल एवं पारदर्शी पंचायतीराज व्यवस्था के सहभागी
राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा—तकनीक का लाभ अंतिम पंचायत और अंतिम जनप्रतिनिधि तक पहुंचाना लक्ष्य
नई दिल्ली/लखनऊ। ग्राम स्वराज की मूल भावना को आधुनिक तकनीक, पारदर्शिता, जवाबदेही और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने 15 अगस्त 2026 को अपने डिजिटल पंचायत अभियान को व्यापक राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। वर्ष 2009 में स्थापित संगठन ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वर्ष 2030 तक देश की प्रत्येक ग्राम पंचायत को डिजिटल, पेपरलेस, पारदर्शी एवं सक्षम बनाने के संकल्प को पुनः स्पष्ट किया।
संगठन के डिजिटल पोर्टल से अब तक 1,26,972 प्राथमिक एवं सक्रिय सदस्य जुड़ चुके हैं। संगठन के अनुसार यह आंकड़ा केवल सदस्य संख्या नहीं, बल्कि देश के पंचायत प्रतिनिधियों के बीच डिजिटल शासन, पारदर्शी व्यवस्था और सशक्त पंचायतीराज के प्रति बढ़ते विश्वास एवं सहभागिता का संकेत है।
ग्राम स्वराज से डिजिटल स्वराज की ओर बढ़ता कदम
ग्रामीण भारत में पंचायतीराज संस्थाएं लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की आधारभूत इकाई हैं। ग्राम पंचायत सीधे नागरिकों से जुड़ी शासन व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण स्तर है। ऐसे में पंचायतों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को डिजिटल माध्यमों से आवश्यक सूचनाएं, मार्गदर्शन, योजनाओं की जानकारी, शिकायत समाधान तथा संबंधित सरकारी सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराना है, ताकि ग्राम पंचायत स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक सूचनापरक, पारदर्शी और उत्तरदायी बन सके।
संगठन का दीर्घकालिक लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक देश की प्रत्येक ग्राम पंचायत तकनीकी रूप से सक्षम हो तथा पंचायत प्रतिनिधि अपनी पंचायत से संबंधित आवश्यक जानकारी के लिए डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग कर सकें।
एक क्लिक पर पंचायत की आवश्यक जानकारी और सहायता
संगठन के डिजिटल पोर्टल को पंचायत प्रतिनिधियों के लिए एक साझा डिजिटल मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पंचायत से संबंधित आवश्यक सूचनाओं और सुविधाओं को एक ही डिजिटल व्यवस्था से जोड़ना है।
पंचायत प्रतिनिधि अपनी ग्राम पंचायत से संबंधित समस्याओं एवं शिकायतों को डिजिटल माध्यम से दर्ज कर सकेंगे। शिकायत को संबंधित स्तर तक पहुंचाने तथा उसके संबंध में आवश्यक अनुवर्ती कार्रवाई को सुगम बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
इसके साथ ही केंद्र एवं राज्य सरकारों के विभिन्न महत्वपूर्ण पोर्टलों और डिजिटल सेवाओं से जुड़ने की सुविधा उपलब्ध कराने का उद्देश्य यह है कि पंचायत प्रतिनिधि अपने गांव से संबंधित योजनाओं, कार्यक्रमों, दिशा-निर्देशों एवं सार्वजनिक सेवाओं की जानकारी अधिक सरलता से प्राप्त कर सकें।
इस व्यवस्था से पंचायत प्रतिनिधियों को सूचना प्राप्त करने, संबंधित अधिकारियों से संपर्क स्थापित करने तथा विकास कार्यों की प्राथमिकताओं को समझने में सहायता मिलेगी।
डिजिटल पंचायत का अर्थ केवल कागज समाप्त करना नहीं
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि डिजिटल पंचायत की अवधारणा को केवल कार्यालयों में कागज का उपयोग कम करने तक सीमित नहीं किया जा सकता। वास्तविक डिजिटल पंचायत वही होगी, जहां पंचायत का निर्वाचित प्रतिनिधि स्वयं तकनीक का उपयोग करते हुए अपनी ग्राम पंचायत की योजनाओं, विकास कार्यों, सरकारी सेवाओं, आवश्यकताओं और समस्याओं की जानकारी प्राप्त कर सके।
उन्होंने कहा कि संगठन का प्रयास पंचायत प्रतिनिधियों को किसी व्यक्ति या कार्यालय पर अनावश्यक रूप से निर्भर बनाने के बजाय उन्हें डिजिटल रूप से साक्षर, जागरूक, सक्षम और निर्णय लेने में आत्मनिर्भर बनाना है।
“हमारा स्पष्ट विश्वास है कि जब पंचायत प्रतिनिधि सक्षम होगा, तभी पंचायत मजबूत होगी; जब पंचायत मजबूत होगी, तभी गांव आत्मनिर्भर बनेगा और जब गांव आत्मनिर्भर होंगे, तभी आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को जमीनी मजबूती मिलेगी।”
पंचायत प्रतिनिधि बने डिजिटल परिवर्तन के केंद्रबिंदु
संगठन के अनुसार डिजिटल परिवर्तन का वास्तविक लाभ तभी प्राप्त होगा, जब पंचायत प्रतिनिधि स्वयं इस प्रक्रिया के सक्रिय सहभागी बनें। इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों को डिजिटल साधनों के उपयोग, सरकारी योजनाओं की जानकारी, ऑनलाइन सेवाओं, शिकायत एवं सूचना प्रणालियों तथा पंचायत से संबंधित डिजिटल संसाधनों के प्रति जागरूक करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।
संगठन का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें पंचायत प्रतिनिधि अपने मोबाइल फोन अथवा अन्य डिजिटल माध्यमों से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकें और अपनी पंचायत से संबंधित विषयों को अधिक प्रभावी ढंग से समझ सकें।
भाषा की बाधा समाप्त करने की दिशा में पहल
भारत की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए संगठन के डिजिटल प्लेटफॉर्म को विभिन्न राज्यों एवं क्षेत्रों की स्थानीय भाषाओं में अधिक उपयोगी बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
संगठन का मानना है कि डिजिटल सशक्तीकरण तभी सार्थक होगा जब तकनीक गांव के सामान्य जनप्रतिनिधि के लिए सरल, सहज और समझने योग्य हो। डिजिटल व्यवस्था किसी विशेष वर्ग तक सीमित न रहकर ग्राम पंचायत स्तर के प्रत्येक प्रतिनिधि तक पहुंचे—इसी उद्देश्य को प्राथमिकता दी जा रही है।
पंचायत सचिवालय से लेकर जनप्रतिनिधि तक—क्षमता निर्माण पर जोर
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन का मानना है कि पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों की संस्थागत एवं डिजिटल क्षमता का विकास आवश्यक है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि को केवल योजनाओं के क्रियान्वयन में सहभागी नहीं, बल्कि पंचायत के विकास की दिशा तय करने वाला सक्षम जनप्रतिनिधि बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि—
“हमारा उद्देश्य किसी व्यवस्था का विकल्प बनना नहीं, बल्कि पंचायत प्रतिनिधियों को इतना सक्षम बनाना है कि वे उपलब्ध सरकारी व्यवस्थाओं और डिजिटल संसाधनों का स्वयं प्रभावी उपयोग कर सकें। जानकारी ही सशक्तीकरण का पहला आधार है।”
प्रत्येक जनपद में जमीनी स्थिति का तथ्यात्मक आकलन
पंचायतों की वास्तविक स्थिति और आवश्यकताओं को सामने लाने के लिए संगठन द्वारा जनपद स्तर पर मीडिया प्रतिनिधियों की सहभागिता को भी महत्व दिया जा रहा है।
इनका उद्देश्य ग्राम पंचायतों में उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं, विकास कार्यों, डिजिटल संसाधनों तथा स्थानीय आवश्यकताओं की वास्तविक स्थिति का तथ्यात्मक आकलन कर संबंधित मंच तक जानकारी पहुंचाना है।
संगठन का मानना है कि ग्रामीण विकास की प्रभावी योजना तभी तैयार की जा सकती है, जब ग्राम पंचायत स्तर की वास्तविक परिस्थितियों और प्राथमिकताओं का सही आंकलन उपलब्ध हो।
विशेषज्ञों के अनुभव का पंचायत प्रतिनिधियों को लाभ
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन से वरिष्ठ पूर्व आईएएस अधिकारी, पंचायत विभाग के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व जिला पंचायत राज अधिकारी तथा पंचायतीराज क्षेत्र के विशेषज्ञ जुड़े हुए हैं।
इन अनुभवी व्यक्तियों के मार्गदर्शन का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशासनिक प्रक्रिया, पंचायतीराज व्यवस्था, सरकारी योजनाओं, स्थानीय शासन एवं विकास संबंधी विषयों को समझने में सहयोग प्रदान करना है।
संगठन का मानना है कि ग्रामीण विकास केवल योजनाओं की घोषणा से संभव नहीं है। योजनाओं की सही जानकारी, स्थानीय आवश्यकता की पहचान, प्रभावी क्रियान्वयन और जनप्रतिनिधियों की क्षमता—इन सभी का समन्वय आवश्यक है।
1,26,972 सदस्य—संगठन से अधिक एक व्यापक जनभागीदारी
संगठन के डिजिटल पोर्टल पर 1,26,972 सदस्य जुड़ना डिजिटल पंचायत अभियान की बढ़ती पहुंच का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
संगठन ने देशभर के पंचायत प्रतिनिधियों से आह्वान किया है कि वे इस डिजिटल अभियान से जुड़ें और पंचायतीराज व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी एवं जनोन्मुख बनाने की प्रक्रिया में सहभागी बनें।
राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा—
“हमारा सपना ऐसी ग्राम पंचायत का है, जहां जानकारी के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, शिकायतों के लिए कागजों का ढेर न लगाना पड़े और पंचायत प्रतिनिधि अपनी ग्राम पंचायत की प्रत्येक आवश्यकता को डिजिटल माध्यम से समझकर उसके समाधान की दिशा में प्रभावी पहल कर सके।”
2030—समय-सीमा नहीं, राष्ट्रीय संकल्प
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने वर्ष 2030 को अपने डिजिटल पंचायत अभियान की महत्वपूर्ण समय-सीमा के रूप में निर्धारित करते हुए इसे व्यापक राष्ट्रीय संकल्प के रूप में प्रस्तुत किया है।
संगठन का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में पंचायत स्तर पर डिजिटल संसाधनों का विस्तार, प्रतिनिधियों की क्षमता निर्माण, सूचना की उपलब्धता, पारदर्शिता और जवाबदेही को निरंतर मजबूत किया जाए।
संगठन का संकल्प
हर गांव—डिजिटल हो।
हर पंचायत—सक्षम हो।
हर प्रतिनिधि—तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर हो।
हर व्यवस्था—पारदर्शी हो।
हर नागरिक—सूचना से सशक्त हो।
हर गांव—आत्मनिर्भर हो।
डिजिटल पंचायत से आत्मनिर्भर गांव की ओर
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन का मानना है कि डिजिटल तकनीक शासन और जनता के बीच की दूरी कम करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। यदि पंचायत प्रतिनिधियों को समय पर सही सूचना, तकनीकी संसाधन और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध हो, तो ग्राम पंचायतें अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक प्रभावी निर्णय ले सकती हैं।
इसी दृष्टिकोण के साथ संगठन वर्ष 2030 तक डिजिटल एवं पेपरलेस पंचायत की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों को जोड़ने, डिजिटल जागरूकता बढ़ाने और पंचायतों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के अभियान को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी का संदेश है—
“डिजिटल पंचायत केवल तकनीक का प्रयोग नहीं, बल्कि ग्राम स्वराज को नई शक्ति देने का माध्यम है। हमारा लक्ष्य ऐसी पंचायत व्यवस्था का निर्माण है, जहां जनप्रतिनिधि सक्षम हों, व्यवस्था पारदर्शी हो, नागरिकों की भागीदारी बढ़े और प्रत्येक गांव विकास एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़े।”
आज ही डिजिटल अभियान से जुड़ें
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी एवं सेवाओं का लाभ लेने के लिए विजिट करें:
“सशक्त संगठन • सशक्त पंचायत • सतत् विकास”
For more details visit: Uttar Pradesh Panchayatiraj Dept
