“जल संरक्षण को धार्मिक आस्था से जोड़कर जनआंदोलन बनाएं, तभी सुरक्षित रहेगा भविष्य”
लखनऊ। जल झुलनी एकादशी के पावन अवसर पर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि जल झुलनी एकादशी भारतीय सनातन परंपरा में आस्था, प्रकृति और जल के महत्व को समझने का पर्व है। जल जीवन का आधार है, इसलिए इस अवसर पर प्रत्येक व्यक्ति को जल बचाने, जल स्रोतों को स्वच्छ रखने और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए।
विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा, “हमारी पंचायतें जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत में तालाबों, कुओं और पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण तथा वर्षा जल संचयन को जनअभियान बनाया जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित न रहें, बल्कि सेवा, सद्भाव, स्वच्छता, प्रकृति संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का माध्यम बनें। जल संरक्षण को धार्मिक आस्था और जनभागीदारी से जोड़कर इसे व्यापक सामाजिक अभियान का स्वरूप दिया जा सकता है।
श्री अवस्थी ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को पर्याप्त जल और स्वच्छ पर्यावरण उपलब्ध कराना आज की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है। जल बचाने का संकल्प केवल पर्व विशेष तक सीमित न रहकर हर परिवार, गांव और ग्राम पंचायत की दैनिक जिम्मेदारी बनना चाहिए।
उन्होंने कहा, “जल है तो जीवन है। जल की एक-एक बूंद भविष्य की पूंजी है और इसका संरक्षण हमारी नैतिक, सामाजिक तथा राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।”
जल झुलनी एकादशी के अवसर पर उन्होंने सभी नागरिकों से “जल बचाएं, जल स्रोत बचाएं और प्रकृति बचाएं” के संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए देशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और स्वस्थ जीवन की कामना की।
