एकात्म मानववाद एवं अंत्योदय की अवधारणा समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान का मार्गदर्शक

कानपुर। ‘एकात्म मानववाद’ एवं ‘अंत्योदय’ के प्रणेता, प्रखर राष्ट्रचिंतक एवं भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ !
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का चिंतन भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और समाज के सर्वांगीण विकास पर आधारित था। उन्होंने विकास की ऐसी अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को विशेष प्राथमिकता दी गई।
उन्होंने कहा कि ‘अंत्योदय’ केवल एक विचार नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक विकास और अवसर पहुंचाने की प्रतिबद्धता है। ग्राम पंचायतों और स्थानीय स्वशासन की भूमिका भी इसी भावना को धरातल पर मजबूत करने में महत्वपूर्ण है।
श्री अवस्थी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का एकात्म मानववाद आज भी सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता, ग्रामीण विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में मार्गदर्शन प्रदान करता है। उनके विचारों से प्रेरणा लेते हुए पंचायतों को अंतिम व्यक्ति तक विकास योजनाओं का प्रभावी लाभ पहुंचाने, जनभागीदारी बढ़ाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर उनके आदर्शों और विचारों को स्मरण करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति के सम्मान, अवसर और विकास के संकल्प को दोहराया।
