वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू होगी केंद्र प्रायोजित योजना, ग्रामीण विकास और जमीनी सुशासन को मिलेगी नई दिशा
नई दिल्ली। ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण और ग्राम पंचायतों को अधिक सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना’ को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में स्वीकृति प्रदान की है।

आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय ग्राम पंचायतों की विकास क्षमता को मजबूत करने, स्थानीय स्तर पर सुशासन को बढ़ावा देने तथा जनभागीदारी को नई गति देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस योजना का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को अधिक विकासोन्मुख, सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना है। मजबूत पंचायत व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की बेहतर योजना, स्थानीय आवश्यकताओं की पहचान और जनहितकारी पहलों को गति मिलने की उम्मीद है।
पंचायतीराज व्यवस्था लोकतंत्र की बुनियादी इकाई है। ऐसे में ग्राम पंचायतों की संस्थागत क्षमता, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना ग्रामीण भारत के समग्र विकास के लिए अहम है।
सशक्त पंचायत, समृद्ध गांव और विकसित भारत का संकल्प तभी साकार होगा, जब ग्रामीण जनता की भागीदारी के साथ पंचायतें विकास की प्रभावी वाहक बनेंगी।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन की दृष्टि में पंचायतों का सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर गांवों और समावेशी ग्रामीण विकास की मजबूत नींव है।
