‘पंचायत रत्न’ के माध्यम से उत्कृष्ट पंचायत नेतृत्व को मिलेगा सम्मान
विवेक चन्द्र अवस्थी
राष्ट्रीय अध्यक्ष, ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन
आजमगढ़ । 2 अक्टूबर देश के लिए दो महान विभूतियों—राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री—की जयंती का पावन अवसर है। महात्मा गांधी ने देश को सत्य, अहिंसा, स्वच्छता और ग्राम स्वराज का संदेश दिया, जबकि लाल बहादुर शास्त्री ने सादगी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा का अनुपम आदर्श प्रस्तुत किया।

आज इन दोनों महापुरुषों के विचार पंचायतीराज व्यवस्था के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। गांधी जी की ग्राम स्वराज की अवधारणा सशक्त ग्राम सभा और व्यापक जनभागीदारी की प्रेरणा देती है। वहीं, शास्त्री जी का जीवन पंचायत प्रतिनिधियों को यह संदेश देता है कि सार्वजनिक पद अधिकार का नहीं, बल्कि जनसेवा के दायित्व का प्रतीक है।

इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने प्रत्येक वर्ष 2 अक्टूबर को ‘पंचायत रत्न सम्मान’ प्रदान करने की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। इस सम्मान के माध्यम से जनसेवा, पारदर्शिता, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, नवाचार और ग्राम विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पंचायत प्रतिनिधियों तथा ग्रामीण नेतृत्व को सम्मानित किया जाएगा।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि ‘पंचायत रत्न’ केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि ग्राम स्वराज की भावना और उत्कृष्ट जनसेवा का अभिनंदन है। इसका उद्देश्य पंचायतों के उत्कृष्ट कार्यों को पहचान दिलाना और उनके सफल अनुभवों को अन्य गांवों के लिए प्रेरणा तथा मार्गदर्शन का माध्यम बनाना है।
उन्होंने कहा कि गांधी जी का ग्राम स्वराज और शास्त्री जी की सादगी एवं कर्तव्यनिष्ठा ग्रामीण लोकतंत्र के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेंगे। सशक्त ग्राम सभा, पारदर्शी पंचायत व्यवस्था, महिला नेतृत्व, युवा सहभागिता और किसान-केंद्रित विकास के माध्यम से ही सशक्त एवं आत्मनिर्भर ग्राम भारत का निर्माण संभव है।
2 अक्टूबर को ‘पंचायत रत्न’ के माध्यम से उत्कृष्ट पंचायत नेतृत्व का सम्मान गांधी जी और शास्त्री जी के आदर्शों को जनसेवा से जोड़ने की दिशा में संगठन का एक सार्थक प्रयास है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री को शत-शत नमन।
जय हिंद। जय किसान। जय ग्राम स्वराज। जय पंचायतीराज।
