मेरे सम्मानित साथियों ,
वर्षा ऋतु केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं है, अपितु यह प्रकृति के नवसृजन, संवर्धन, समृद्धि एवं जीवन के पुनर्जागरण का पावन पर्व है। चातुर्मास का यह पुण्यकाल हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य, संयम, संवेदनशीलता, अनुशासन एवं संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है। धरती पर पड़ने वाली प्रत्येक वर्षा की बूंद हमें यह संदेश देती है कि मानव और प्रकृति का संबंध परस्पर सहयोग, संरक्षण एवं सह-अस्तित्व का है।
किन्तु यह भी सत्य है कि प्रकृति के इस अनुपम वरदान के साथ कुछ प्राकृतिक चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं। वर्षा ऋतु में आकाशीय बिजली गिरने, अतिवृष्टि, जलभराव एवं जलस्तर बढ़ने जैसी घटनाएं जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं। अतः सभी नागरिकों से विनम्र आग्रह है कि तेज वर्षा एवं बिजली कड़कने के समय अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें, खुले मैदानों एवं पेड़ों के नीचे शरण न लें तथा सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।
नदियों, तालाबों एवं जलाशयों का जलस्तर अचानक बढ़ने की संभावना रहती है। इसलिए स्नान, आवागमन अथवा अन्य गतिविधियों के दौरान विशेष सावधानी बरतें। बच्चों, बुजुर्गों एवं महिलाओं की सुरक्षा के प्रति विशेष संवेदनशीलता रखें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन करें।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन प्रदेश के समस्त ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा जागरूक नागरिकों से आह्वान करता है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जनजागरूकता अभियान संचालित कर प्रत्येक परिवार तक सुरक्षा एवं सावधानी का संदेश पहुंचाएं।
आज आवश्यकता केवल स्वयं सुरक्षित रहने की नहीं, बल्कि अपने गांव, अपने परिवार और अपने समाज को भी सुरक्षित रखने की है। जागरूक नागरिक, सशक्त पंचायत और संगठित समाज ही सुरक्षित एवं समृद्ध प्रदेश की आधारशिला होते हैं।
आइए, इस वर्षा ऋतु में हम सभी प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनें, सावधानी को अपना संकल्प बनाएं तथा जनहित एवं जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
आप सभी के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं सुरक्षित जीवन की मंगलकामनाओं सहित।
