विजयादशमी विशेष लेख | मेरी कलम से…
विवेक चन्द्र अवस्थी
राष्ट्रीय अध्यक्ष, ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन

विजयादशमी भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और नैतिक मूल्यों का ऐसा पावन पर्व है, जो हमें सत्य के मार्ग पर चलने, अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और समाज में सद्भाव, शांति एवं न्याय की स्थापना करने की प्रेरणा देता है। यह पर्व केवल भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का उत्सव नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर विद्यमान अहंकार, क्रोध, लोभ, छल, ईर्ष्या और अन्याय जैसी बुराइयों पर विजय प्राप्त करने का संकल्प भी है।
भारतीय परंपरा में भगवान श्रीराम मर्यादा, सत्यनिष्ठा, कर्तव्यपरायणता, करुणा और लोककल्याण के प्रतीक हैं। उनकी जीवनयात्रा हमें सिखाती है कि परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य और धर्म का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
रावण का विशाल ज्ञान, सामर्थ्य और वैभव भी उसके अहंकार तथा अधर्म को पराजय से नहीं बचा सका। इसके विपरीत, भगवान श्रीराम ने मर्यादा, धैर्य, साहस और धर्म के बल पर विजय प्राप्त की। यही विजयादशमी का शाश्वत संदेश है—शक्ति का वास्तविक महत्त्व दूसरों को दबाने में नहीं, बल्कि निर्बलों की रक्षा करने और न्याय की स्थापना करने में है।
आज जब समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब विजयादशमी का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। भ्रष्टाचार, सामाजिक भेदभाव, महिला उत्पीड़न, नशाखोरी, पर्यावरण प्रदूषण और नैतिक मूल्यों में गिरावट जैसी बुराइयों के विरुद्ध सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
हमें यह समझना होगा कि केवल प्रतीकात्मक रूप से रावण के पुतले का दहन कर देने से समाज की बुराइयाँ समाप्त नहीं होंगी। वास्तविक विजय तब होगी, जब हम अपने आचरण में ईमानदारी अपनाएँगे, दूसरों के अधिकारों का सम्मान करेंगे और अन्याय के विरुद्ध निर्भीक होकर आवाज उठाएँगे।
रावण का पुतला जलाना एक परंपरा है, लेकिन अपने भीतर के अहंकार, लोभ और अन्याय को समाप्त करना ही विजयादशमी की वास्तविक साधना है।

सशक्त पंचायतें, न्यायपूर्ण समाज और विकसित भारत
ग्रामीण भारत की प्रगति में ग्राम पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। पंचायतें केवल स्थानीय प्रशासन की इकाइयाँ नहीं, बल्कि लोकतंत्र को गाँव-गाँव तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम हैं।
विजयादशमी के अवसर पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता, जवाबदेही, समानता और जनभागीदारी को मजबूत करेंगे। विकास योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुँचाने, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, युवाओं को सकारात्मक दिशा देने और समाज के वंचित वर्गों को सम्मानजनक अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।
एक आदर्श पंचायत वही है, जहाँ किसी के साथ भेदभाव न हो, प्रत्येक नागरिक की बात सुनी जाए और निर्णय जनहित तथा न्याय के आधार पर लिए जाएँ। जब गाँवों में न्याय, सद्भाव और विकास की भावना मजबूत होगी, तभी विकसित भारत का संकल्प साकार होगा।
बुराई पर विजय का संकल्प अपने भीतर से शुरू करें
विजयादशमी हमें आत्ममंथन का अवसर देती है। हमें स्वयं से प्रश्न करना चाहिए कि क्या हम अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन कर रहे हैं? क्या हम दूसरों के अधिकारों का सम्मान करते हैं? क्या हम समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए अपना योगदान दे रहे हैं?
यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में सत्य, सेवा, सदाचार और कर्तव्यनिष्ठा को स्थान दे, तो समाज में व्यापक परिवर्तन संभव है। परिवारों में संस्कार, समाज में सद्भाव और सार्वजनिक जीवन में नैतिकता ही एक मजबूत राष्ट्र की आधारशिला हैं।
आइए, इस विजयादशमी पर हम संकल्प लें कि अन्याय का विरोध करेंगे, सत्य का साथ देंगे, नारी सम्मान की रक्षा करेंगे, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देंगे और राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करेंगे।
विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ
यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, सद्बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे। समाज में प्रेम, भाईचारा और एकता मजबूत हो तथा सत्य, धर्म और न्याय की विजय का प्रकाश प्रत्येक घर और प्रत्येक गाँव तक पहुँचे।
आइए, मिलकर आज के दिन अच्छाई का सम्मान और बुराई का नाश करने का संकल्प लें।
आप सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं मंगलकामनाएँ।
