माँ स्कन्दमाता की आराधना — ममता, शक्ति और सद्बुद्धि का दिव्य संदेश
मेरी कलम से — विवेक चन्द्र अवस्थी
राष्ट्रीय अध्यक्ष
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
आदिशक्ति माँ दुर्गा के पंचम स्वरूप माँ स्कन्दमाता के पावन चरणों में कोटि-कोटि नमन एवं समस्त देशवासियों को शारदीय नवरात्रि के पंचम दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

नवरात्रि का पाँचवाँ दिन माँ स्कन्दमाता की उपासना को समर्पित है। भगवान कार्तिकेय की माता होने के कारण वे स्कन्दमाता कहलाती हैं। कमल के आसन पर विराजमान माँ का दिव्य स्वरूप ममता, वात्सल्य, करुणा, ज्ञान और शक्ति का अद्भुत संगम है। उनकी गोद में विराजमान बाल स्कन्द हमें यह संदेश देते हैं कि संस्कारों से सींची गई संतान ही समाज और राष्ट्र की सच्ची शक्ति बनती है।

माँ स्कन्दमाता का संदेश केवल भक्ति नहीं, जीवन को सही दिशा देने का भी संदेश है। उनकी आराधना हमें सिखाती है कि शक्ति के साथ विवेक, अधिकार के साथ कर्तव्य और सफलता के साथ विनम्रता का होना आवश्यक है। परिवार में प्रेम, समाज में सद्भाव और राष्ट्र के प्रति समर्पण ही सच्चे संस्कारों की पहचान हैं।
आज जब हमारा ग्रामीण भारत विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब माँ स्कन्दमाता की शिक्षाएँ विशेष प्रासंगिक हैं। सशक्त परिवार, संस्कारित युवा, शिक्षित बेटियाँ और जागरूक नागरिक ही सशक्त पंचायतों की आधारशिला हैं। पंचायतों के माध्यम से जनसेवा, सामाजिक समरसता और ग्राम विकास को नई गति देना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
आइए, इस पावन अवसर पर हम संकल्प लें कि अपने परिवारों में प्रेम और संस्कार, समाज में सहयोग और समरसता तथा गाँवों में विकास और जनभागीदारी को बढ़ावा देंगे। किसी जरूरतमंद की सहायता, किसी बच्चे की शिक्षा में सहयोग और किसी परिवार के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास भी माँ की सच्ची आराधना है।
माँ स्कन्दमाता से प्रार्थना है कि वे सभी के जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्रदान करें। हमारे संकल्पों को सामर्थ्य दें, विचारों को पवित्रता दें और कर्मों को जनकल्याण की दिशा प्रदान करें।
माँ की कृपा से हर घर में खुशहाली हो, हर परिवार में प्रेम बना रहे और हमारा राष्ट्र निरंतर उन्नति के पथ पर अग्रसर हो।
जय माँ स्कन्दमाता…! जय माता दी…!
