॥ ॐ नमः शिवाय ॥
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
नमः शम्भवाय च मयोभवाय च।
नमः शङ्कराय च मयस्कराय च॥
— श्रीरुद्रम, यजुर्वेद
लखनऊ।
श्रावण मास के पावन प्रथम सोमवार के परम मंगलमय एवं पुण्यप्रद अवसर पर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने समस्त पंचायत प्रतिनिधियों,श्रद्धालुओं एवं देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं मंगलाशंसाएँ प्रेषित करते हुए देवाधिदेव महादेव से राष्ट्र की अखण्ड समृद्धि, जनकल्याण, उत्तम स्वास्थ्य, आध्यात्मिक उन्नति तथा विश्वशांति की कामना की।

उन्होंने कहा कि सनातन वैदिक परंपरा में श्रावण मास भगवान सदाशिव की आराधना, तप, संयम, आत्मशुद्धि एवं लोकमंगल का सर्वोच्च आध्यात्मिक पर्व है। विशेषतः श्रावण का प्रथम सोमवार श्रद्धा, भक्ति और धर्मनिष्ठ जीवन का ऐसा पावन अवसर है, जब भक्त पूर्ण समर्पण के साथ भगवान आशुतोष का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक एवं पूजन-अर्चन कर उनके दिव्य अनुग्रह के पात्र बनते हैं।
श्री अवस्थी ने कहा कि भगवान शिव केवल देवों के देव महादेव ही नहीं, बल्कि समरसता, करुणा, न्याय, त्याग, तपस्या, सादगी, पर्यावरण संरक्षण एवं लोकमंगल के शाश्वत प्रतीक हैं। समुद्र मंथन के समय समस्त सृष्टि की रक्षा हेतु कालकूट विष का पान कर नीलकंठ बनने वाले भगवान शिव यह संदेश देते हैं कि सच्चा नेतृत्व वही है, जो स्वयं कष्ट सहकर समाज और मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करे।
उन्होंने कहा कि शिवतत्त्व हमें यह शिक्षा देता है कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, समर्पण, परोपकार, प्रकृति संरक्षण, जल संवर्धन, वृक्षारोपण, ग्राम स्वच्छता तथा समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान में ही उसकी वास्तविक अभिव्यक्ति है। यही भावना ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के ग्रामोत्थान एवं राष्ट्रोत्थान के संकल्प का मूलाधार है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक ग्राम स्वच्छ, आत्मनिर्भर, शिक्षित, संस्कारित एवं पर्यावरण-संवेदनशील बने, तो भारत को विकसित, समृद्ध एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने से कोई शक्ति नहीं रोक सकती। ग्रामोदय ही राष्ट्रोदय का प्रथम सोपान है और यही भगवान शिव के लोककल्याणकारी दर्शन का व्यावहारिक स्वरूप भी है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना के साथ जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाएँ, अधिकाधिक वृक्षारोपण करें, नदियों, तालाबों एवं जलस्रोतों की स्वच्छता बनाए रखें, प्लास्टिक प्रदूषण से प्रकृति की रक्षा करें तथा निर्धन, असहाय एवं जरूरतमंद लोगों की सेवा को अपनी उपासना का अनिवार्य अंग बनाएँ। भगवान शिव की कृपा उसी पर पूर्ण रूप से बरसती है, जिसकी भक्ति लोकमंगल और मानव सेवा से अनुप्राणित होती है।
उन्होंने कहा कि “शिव” शब्द स्वयं कल्याण का पर्याय है। अतः श्रावण का यह पावन पर्व समस्त मानवता के लिए शांति, सद्भाव, समरसता एवं सत्कर्म का संदेश लेकर आता है।
अंत में श्री अवस्थी ने भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की कि देश का प्रत्येक ग्राम विकास, समृद्धि और आत्मनिर्भरता का आदर्श बने; प्रत्येक किसान की तपस्या सफल हो; युवाओं को सम्मानजनक अवसर प्राप्त हों; मातृशक्ति सुरक्षित एवं गौरवान्वित रहे; बाल पीढ़ी संस्कार, शिक्षा और चरित्र से समृद्ध बने तथा प्रत्येक परिवार प्रेम, स्वास्थ्य, सौहार्द और आध्यात्मिक चेतना से आलोकित हो।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी की ओर से समस्त देशवासियों को श्रावण मास के प्रथम सोमवार की पुनः हार्दिक शुभकामनाएँ।
भगवान भोलेनाथ की कृपा से—
“सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥”
**॥ हर-हर महादेव ॥
॥ ॐ नमः शिवाय ॥**
— जारीकर्ता : मीडिया प्रकोष्ठ, ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन
