लखनऊ, 1 अगस्त।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा है कि ग्राम पंचायतों में महिला नेतृत्व ने ग्रामीण भारत की विकास यात्रा को नई गति और नई दिशा प्रदान की है। आज महिला पंचायत प्रतिनिधि केवल जनप्रतिनिधि की भूमिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक जागरूकता, महिला सशक्तिकरण, सुशासन और समावेशी विकास की सबसे प्रभावी आधारशिला बनकर उभरी हैं।
उन्होंने कहा कि संविधान के 73वें संशोधन के माध्यम से पंचायतों में महिलाओं को मिला संवैधानिक प्रतिनिधित्व भारतीय लोकतंत्र की ऐतिहासिक उपलब्धि है। इसका परिणाम यह हुआ कि देश के लाखों गाँवों में महिलाओं ने नेतृत्व संभालकर विकास योजनाओं को जनभागीदारी से जोड़ते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, पोषण, महिला सुरक्षा, बालिका शिक्षा और आजीविका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिवर्तन सुनिश्चित किए हैं।
विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि महिला पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने संवेदनशील, पारदर्शी और उत्तरदायी नेतृत्व से यह सिद्ध किया है कि ग्रामीण विकास तभी सार्थक हो सकता है, जब उसमें महिलाओं की सक्रिय एवं निर्णायक भागीदारी हो। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों, बाल विवाह, दहेज प्रथा, नशाखोरी, लैंगिक भेदभाव तथा घरेलू हिंसा के विरुद्ध जनजागरण अभियान चलाकर समाज में सकारात्मक चेतना का संचार किया है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महिला पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि उन्हें नियमित प्रशिक्षण, डिजिटल तकनीक, वित्तीय अधिकारों की समझ तथा प्रशासनिक सहयोग निरंतर उपलब्ध कराया जाए तो वे ग्रामीण विकास की गति को कई गुना अधिक प्रभावी बना सकती हैं।
श्री अवस्थी ने कहा कि ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन देशभर की महिला पंचायत प्रतिनिधियों को नेतृत्व विकास, सुशासन, नवाचार एवं डिजिटल सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है। संगठन का विश्वास है कि सशक्त महिला नेतृत्व ही आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित ग्राम पंचायतों की सबसे मजबूत आधारशिला है।
उन्होंने सभी महिला पंचायत प्रतिनिधियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे जनसेवा, पारदर्शिता और सामाजिक उत्तरदायित्व को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ग्राम स्वराज की अवधारणा को साकार करें तथा विकसित भारत के निर्माण में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका को और अधिक सशक्त बनाएं।
