ग्राम प्रधान मो. असलम खान के दूरदर्शी नेतृत्व में आत्मनिर्भर ग्रामीण विकास का जीवंत मॉडल बनी आज़मगढ़ की ग्राम पंचायत बीनापारा, विकसित भारत के संकल्प को दे रही नई दिशा
✍ विवेक चन्द्र अवस्थी
राष्ट्रीय अध्यक्ष, ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन
“विकसित भारत–2047” का संकल्प तभी साकार होगा, जब देश की ग्राम पंचायतें प्रशासनिक इकाई भर न रहकर आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और नवाचार आधारित विकास का केंद्र बनें। उत्तर प्रदेश के जनपद आज़मगढ़ की ग्राम पंचायत बीनापारा ने इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए एक ऐसा अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत किया है, जो पूरे पंचायती राज तंत्र के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।

ग्राम प्रधान मो. असलम खान, जो ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं, ने अपने दूरदर्शी नेतृत्व, जनहितकारी सोच और पारदर्शी कार्यशैली से ग्राम पंचायत बीनापारा को विकास की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। पंचायत भवन के उत्कृष्ट निर्माण के बाद अब आधुनिक व्यायामशाला (जिम) की स्थापना कर उन्होंने यह संदेश दिया है कि पंचायतें केवल सरकारी अनुदानों की उपभोक्ता नहीं, बल्कि स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग से स्वयं की आय अर्जित करने वाली आर्थिक इकाई भी बन सकती हैं।

मुख्यमंत्री पुरस्कार से प्राप्त धनराशि का उपयोग शासन की मंशा के अनुरूप ग्राम पंचायत की स्वयं की आय (Own Source Revenue – OSR) बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया। परिणामस्वरूप अप्रैल 2026 से संचालित आधुनिक व्यायामशाला आज ग्रामीण युवाओं के स्वास्थ्य, अनुशासन और आत्मविश्वास का केंद्र बन चुकी है। यह पहल केवल एक भवन का निर्माण नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जनस्वास्थ्य और स्थानीय रोजगार को एक साथ जोड़ने वाला अभिनव मॉडल है।
ग्राम पंचायत बीनापारा के निवासियों के लिए ₹400 प्रतिमाह तथा अन्य ग्रामों के नागरिकों के लिए ₹500 प्रतिमाह शुल्क निर्धारित किया गया है। समस्त भुगतान QR कोड के माध्यम से सीधे ग्राम पंचायत के OSR खाते में जमा किया जाता है। डिजिटल भुगतान प्रणाली ने वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन की एक नई मिसाल स्थापित की है।
वर्तमान में आसपास के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से लगभग 70 सदस्य नियमित रूप से इस व्यायामशाला का लाभ उठा रहे हैं। इससे ग्राम पंचायत को लगभग ₹7.20 लाख वार्षिक स्वयं की आय प्राप्त हो रही है। यह आय पंचायत क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विकास, सार्वजनिक परिसंपत्तियों के रखरखाव तथा जनहितकारी योजनाओं के संचालन में उपयोग की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि यदि पंचायतें स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर आय-सृजन के नवाचार अपनाएँ, तो वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर सकती हैं।
इस पहल का एक और महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि व्यायामशाला के संचालन हेतु एक स्थानीय युवक को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इससे न केवल स्थानीय रोजगार का सृजन हुआ है, बल्कि ग्रामीण युवाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सकारात्मक जीवनशैली को भी बढ़ावा मिला है। आय एवं व्यय का संपूर्ण विवरण प्रतिदिन रजिस्टर में दर्ज किया जाता है, जिससे पंचायत की वित्तीय व्यवस्था पूर्णतः पारदर्शी एवं उत्तरदायी बनी हुई है।
लगभग 3,030 की आबादी वाली ग्राम पंचायत बीनापारा यह सिद्ध कर रही है कि दूरदर्शी नेतृत्व, जनसहभागिता, नवाचार और सुशासन के समन्वय से ग्राम पंचायतें आत्मनिर्भर विकास की मजबूत आधारशिला बन सकती हैं। पंचायत भवन के बाद आधुनिक व्यायामशाला की स्थापना ने बीनापारा को एक विशिष्ट पहचान दिलाई है और यह मॉडल देशभर की ग्राम पंचायतों के लिए प्रेरक उदाहरण के रूप में उभर रहा है।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन का मानना है कि देश की प्रत्येक ग्राम पंचायत को स्थानीय संसाधनों पर आधारित आय-सृजनकारी परियोजनाओं को बढ़ावा देना चाहिए। इससे पंचायतों की वित्तीय क्षमता बढ़ेगी, ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा, सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा “विकसित भारत–2047” का लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकेगा।
ग्राम प्रधान मो. असलम खान, ग्राम पंचायत बीनापारा की पूरी टीम तथा ग्रामवासियों ने यह सिद्ध किया है कि जब नेतृत्व में विकास का विजन, कार्य में पारदर्शिता और जनता का विश्वास जुड़ जाता है, तब ग्राम पंचायतें परिवर्तन की ऐसी मिसाल बनती हैं, जो दूर-दूर तक प्रेरणा देती हैं।
बीनापारा की यह उपलब्धि केवल एक ग्राम पंचायत की सफलता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की उस सशक्त सोच का जीवंत उदाहरण है, जिसमें गाँव केवल विकास के सहभागी नहीं, बल्कि विकास के नेतृत्वकर्ता बनकर उभरते हैं। आने वाले समय में बीनापारा का यह मॉडल देश की अनेक ग्राम पंचायतों को आर्थिक स्वावलंबन, नवाचार और सुशासन की दिशा में प्रेरित करेगा।
