नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शनिवार को जंतर-मंतर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और जनप्रतिनिधियों ने विरोध प्रदर्शन कर सरकार से शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान सबसे अधिक चर्चा इस नारे की रही— “हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी…”
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि यदि शिक्षा व्यवस्था में सामने आ रही खामियों, सुरक्षा संबंधी लापरवाही और प्रशासनिक जवाबदेही पर पहले ही कठोर कदम उठाए गए होते, तो हाल की दुखद घटना में 22 मासूम बच्चों की जान जाने जैसी त्रासदी टाली जा सकती थी। उनका कहना था कि केवल घटना के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय रहते प्रभावी निर्णय और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक था।
जंतर-मंतर पर जुटे लोगों ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा देशभर के विद्यालयों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, जवाबदेही तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस नीति लागू करने की मांग उठाई। जंतर-मंतर पर पूरे समय शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन हुआ और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस बल तैनात रहा।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है और ऐसी घटनाओं के बाद केवल संवेदना व्यक्त करने के बजाय समयबद्ध एवं प्रभावी सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।
