ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने देश व प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं, चातुर्मास में सेवा, सदाचार एवं ग्राम विकास के संकल्प का किया आह्वान
लखनऊ, 25 जुलाई।
देवशयनी एकादशी के पावन एवं पुण्यदायी अवसर पर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने समस्त देश एवं प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं मंगलकामनाएं प्रेषित करते हुए भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता महालक्ष्मी के श्रीचरणों में श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कामना की कि भगवान श्रीहरि की असीम कृपा से प्रत्येक परिवार में सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, वैभव एवं आध्यात्मिक उन्नति का वास हो तथा सम्पूर्ण राष्ट्र निरंतर विकास और लोककल्याण के पथ पर अग्रसर रहे।
उन्होंने कहा कि देवशयनी एकादशी सनातन धर्म की अत्यंत पवित्र एवं महत्वपूर्ण तिथि है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी से भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं तथा इसी दिन से चातुर्मास का शुभारंभ होता है। यह चार माह का काल आध्यात्मिक साधना, आत्मचिंतन, तप, त्याग, संयम, सेवा, भक्ति एवं सत्कर्म के लिए विशेष रूप से श्रेष्ठ माना गया है। भारतीय संस्कृति में इस अवधि का विशेष महत्व है, क्योंकि यह मनुष्य को आत्मशुद्धि, नैतिक मूल्यों और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देती है।
श्री अवस्थी ने कहा कि देवशयनी एकादशी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि समाज में मानव सेवा, करुणा, सदाचार, परोपकार, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता एवं लोकमंगल की भावना को सशक्त बनाने का भी प्रेरणास्रोत है। यह पर्व हमें अपने व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ समाज एवं राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि चातुर्मास के दौरान प्रत्येक व्यक्ति को अपने आचरण में शुचिता, सत्य, ईमानदारी, अनुशासन, संयम और सेवा की भावना को अपनाना चाहिए। विशेष रूप से ग्राम पंचायतों एवं ग्रामीण समाज में स्वच्छता, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, नशामुक्ति, शिक्षा, सामाजिक सद्भाव और जनकल्याण के कार्यों को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए। यही भगवान श्रीहरि विष्णु की सच्ची आराधना होगी।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि भारत की ग्राम पंचायतें देश के विकास की आधारशिला हैं। यदि प्रत्येक ग्राम पंचायत सेवा, पारदर्शिता, जनभागीदारी एवं नैतिक मूल्यों के साथ कार्य करे तो “ग्रामोदय से राष्ट्रोदय” का संकल्प निश्चित रूप से साकार होगा। उन्होंने सभी पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं युवाओं से आग्रह किया कि वे इस पावन अवसर पर समाजहित एवं राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लें।
उन्होंने भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता महालक्ष्मी से प्रार्थना करते हुए कहा कि उनकी दिव्य कृपा से प्रत्येक परिवार में सुख, शांति, समृद्धि, आरोग्य, वैभव एवं मंगल का वास हो, किसानों के खेत हरे-भरे रहें, ग्रामीण भारत निरंतर उन्नति करे तथा समाज में प्रेम, सद्भाव, भाईचारा एवं आध्यात्मिक चेतना का प्रकाश सदैव बना रहे।
अपने शुभकामना संदेश के अंत में श्री अवस्थी ने समस्त श्रद्धालुओं से धर्म, सेवा, संयम एवं सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान करते हुए भगवान श्रीहरि विष्णु की स्तुति में कहा—
॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
॥ ॐ नमो नारायणाय ॥
॥ श्री विष्णवे नमः ॥
“भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे। देवशयनी एकादशी एवं चातुर्मास का यह पावन पर्व समस्त देशवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, आरोग्य, सद्बुद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति लेकर आए।”
