“राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस”
तिरंगा केवल राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता, स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानों, लोकतांत्रिक मूल्यों एवं राष्ट्र की अखंडता का शाश्वत प्रतीक है।
लखनऊ । राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस के अवसर पर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई प्रेषित करते हुए कहा कि 22 जुलाई भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का अत्यंत गौरवशाली एवं ऐतिहासिक दिवस है। इसी दिन वर्ष 1947 में संविधान सभा द्वारा भारत के तिरंगे को राष्ट्रध्वज के रूप में अंगीकृत किया गया था, जो आज प्रत्येक भारतीय के स्वाभिमान, राष्ट्रीय गौरव, एकता, अखंडता एवं संप्रभुता का सर्वोच्च प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों के अद्वितीय त्याग, बलिदान एवं राष्ट्रनिष्ठा की अमिट स्मृति का प्रतीक है। तिरंगे की प्रत्येक पट्टी तथा अशोक चक्र राष्ट्र के आदर्शों, शांति, प्रगति, साहस, सत्य, समरसता और निरंतर गतिशील विकास का संदेश देते हैं। राष्ट्रध्वज का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक, नैतिक एवं राष्ट्रीय दायित्व है।
विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के भीतर राष्ट्रप्रेम, संवैधानिक मूल्यों के प्रति आस्था तथा राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान की भावना को और अधिक सुदृढ़ एवं संस्कारित किए जाने की आवश्यकता है। विद्यालयों, ग्राम पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों एवं सामाजिक संगठनों के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज के गौरवशाली इतिहास, उसके आदर्शों तथा सम्मान से संबंधित नियमों का व्यापक जनजागरण किया जाना चाहिए, ताकि प्रत्येक नागरिक राष्ट्रध्वज की गरिमा के संरक्षण के प्रति जागरूक एवं उत्तरदायी बन सके।
उन्होंने सभी ग्राम पंचायतों, पंचायत प्रतिनिधियों, युवाओं एवं देशवासियों से आह्वान किया कि वे राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा एवं प्रतिष्ठा को अक्षुण्ण बनाए रखते हुए राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता एवं लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में सक्रिय सहभागिता निभाएँ।
उन्होंने कहा, “तिरंगा केवल हमारी पहचान नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, राष्ट्रीय अस्मिता और करोड़ों देशवासियों की अटूट आस्था का प्रतीक है। इसकी प्रतिष्ठा, सम्मान एवं गौरव की रक्षा करना प्रत्येक भारतीय का सर्वोच्च राष्ट्रीय कर्तव्य है।”
