ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने पर्यावरण संरक्षण, जल सुरक्षा एवं सतत् ग्रामीण विकास के लिए सभी ग्राम पंचायतों से व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने का किया आह्वान।
कानपुर।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का प्रतिकूल प्रभाव अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में लगातार गिरावट, अत्यधिक गर्मी, बाढ़, सूखा, फसलों की उत्पादकता में कमी तथा प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव ग्राम पंचायतों के समक्ष गंभीर चुनौती के रूप में उभर रहा है। ऐसी परिस्थितियों में प्रत्येक ग्राम पंचायत को जलवायु-सहिष्णु (Climate Resilient) विकास मॉडल अपनाकर स्थानीय स्तर पर प्रभावी एवं दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करनी होगी।
उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के 73वें संशोधन के अनुरूप ग्राम पंचायतें स्थानीय स्वशासन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं। अतः पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि ग्राम पंचायत स्तर पर योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए तो जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत को वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, तालाबों एवं पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण, व्यापक वृक्षारोपण, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, सौर ऊर्जा एवं अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग तथा जल एवं ऊर्जा संरक्षण जैसे कार्यों को ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) का अनिवार्य हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से प्रभावी ढंग से मुकाबला केवल सरकारी योजनाओं के माध्यम से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए जनप्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों, किसान संगठनों, युवाओं, महिलाओं एवं आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। ग्राम सभा को इस दिशा में जागरूकता एवं जनसहभागिता का सशक्त मंच बनाया जाना चाहिए, ताकि प्रत्येक नागरिक पर्यावरण संरक्षण को अपना सामाजिक दायित्व समझते हुए योगदान दे सके।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने प्रदेश एवं देश की सभी ग्राम पंचायतों, ग्राम प्रधानों, पंचायत प्रतिनिधियों एवं संबंधित विभागों से अपील की है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने तथा भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए स्थानीय स्तर पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाएँ और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि संगठन आगामी समय में देशभर की ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जलवायु-सहिष्णु ग्राम विकास एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर विशेष जनजागरण अभियान संचालित करेगा, जिससे ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, पर्यावरण-अनुकूल एवं सतत् विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि “सशक्त पंचायत, सुरक्षित पर्यावरण एवं जनसहभागिता के समन्वित प्रयासों से ही विकसित, समृद्ध एवं जलवायु-सुरक्षित ग्रामीण भारत का निर्माण संभव है।”
