मेरी कलम से — विवेक चन्द्र अवस्थी
राष्ट्रीय अध्यक्ष
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन
भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक, ‘मिसाइल मैन’ एवं ‘भारत रत्न’ डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं कोटि-कोटि नमन।

डॉ. कलाम केवल एक महान वैज्ञानिक या भारत के राष्ट्रपति ही नहीं थे, बल्कि वे करोड़ों भारतीयों के लिए आशा, आत्मविश्वास, सादगी और राष्ट्रसेवा के जीवंत प्रतीक थे। साधारण परिवार में जन्म लेकर अपनी प्रतिभा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुँचना उनकी असाधारण जीवनयात्रा का प्रेरणादायी उदाहरण है।

डॉ. कलाम ने भारत के मिसाइल एवं अंतरिक्ष कार्यक्रमों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके वैज्ञानिक नेतृत्व और दूरदर्शी सोच ने भारत की सामरिक क्षमता को सुदृढ़ करने तथा देश को रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे मानते थे कि किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और आत्मविश्वास में निहित होती है।

राष्ट्रपति के रूप में डॉ. कलाम ने अपने पद की गरिमा को जनसरोकारों से जोड़ा। विशेष रूप से विद्यार्थियों और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता इस बात का प्रमाण थी कि वे भारत के भविष्य को नई पीढ़ी की प्रतिभा और चरित्र में देखते थे। उनका संदेश स्पष्ट था—बड़े सपने देखिए, ज्ञान अर्जित कीजिए, कठिन परिश्रम कीजिए और अपने लक्ष्य को राष्ट्रहित से जोड़िए।
उनकी पुस्तक ‘विंग्स ऑफ फायर’ और ‘इग्नाइटेड माइंड्स’ आज भी युवाओं को आत्मविश्वास, नवाचार और सकारात्मक सोच की प्रेरणा देती हैं।
डॉ. कलाम का विकसित भारत का सपना तभी साकार हो सकता है, जब देश के गाँव भी विकास की मुख्यधारा में समान रूप से आगे बढ़ें। सशक्त ग्राम पंचायतें, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ, डिजिटल सशक्तीकरण, रोजगार के अवसर और जनभागीदारी—ये सभी एक आत्मनिर्भर एवं समर्थ भारत की आधारशिलाएँ हैं।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन का भी संकल्प है कि ग्रामीण नेतृत्व को सशक्त बनाकर पंचायतों को विकास, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बनाया जाए। यही प्रयास डॉ. कलाम के उस सपने को आगे बढ़ाने का मार्ग है, जिसमें भारत ज्ञान, समान अवसर और आत्मनिर्भरता के आधार पर विश्व में अग्रणी बने।
डॉ. कलाम का जीवन हमें सिखाता है कि महानता पद से नहीं, बल्कि विचारों, कर्मों और चरित्र से प्राप्त होती है। सर्वोच्च पद पर पहुँचने के बाद भी उनकी सादगी, विनम्रता और विद्यार्थियों के प्रति आत्मीयता सदैव स्मरणीय रहेगी। 27 जुलाई 2015 को विद्यार्थियों के बीच व्याख्यान देते समय उनका निधन हुआ, लेकिन उनके विचार आज भी करोड़ों लोगों के मन में जीवित हैं।
उनकी जयंती केवल एक महान व्यक्तित्व को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि स्वयं से यह संकल्प लेने का दिन है कि हम अपने ज्ञान, कौशल और सामर्थ्य का उपयोग राष्ट्रनिर्माण में करेंगे।
आइए, डॉ. कलाम के विचारों को अपने जीवन का मार्गदर्शक बनाकर एक शिक्षित, आत्मनिर्भर, समृद्ध और समर्थ भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।
महान राष्ट्रनायक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को उनकी जयंती पर शत्-शत् नमन। उनकी प्रेरणा, विचार और राष्ट्रसेवा का आदर्श सदैव हमारा मार्गदर्शन करता रहेगा।
जय हिंद! जय भारत!
