विश्व शांति दिवस पर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दिया शांति, सद्भाव और अहिंसा का संदेश
कानपुर। विश्व शांति दिवस के अवसर पर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने शांति, अहिंसा, प्रेम, करुणा और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मानवता की वास्तविक शक्ति हथियारों में नहीं, बल्कि दयालु हृदय, संवेदनशील सोच और मानवीय मूल्यों में निहित है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का शाश्वत सूत्र “अहिंसा परमो धर्मः” आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक है। हिंसा, आतंक और द्वेष जहां विनाश को जन्म देते हैं, वहीं संवाद, सहयोग और सह-अस्तित्व समाज को स्थायी विकास और समृद्धि की दिशा में ले जाते हैं।
विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति का नाम नहीं है, बल्कि ऐसी सामाजिक व्यवस्था है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षा, सम्मान और अपनत्व का अनुभव हो। शांति की शुरुआत व्यक्ति के विचारों और व्यवहार से होती है तथा इसका विस्तार परिवार, समाज और राष्ट्र तक होता है।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतें शांति और सामाजिक सद्भाव की पहली लोकतांत्रिक पाठशाला हैं। पंचायत स्तर पर संवाद, जनभागीदारी, समानता, पारदर्शिता और आपसी सहयोग को बढ़ावा देकर गांवों में ऐसा वातावरण तैयार किया जा सकता है, जहां मतभेद संघर्ष का कारण बनने के बजाय संवाद और समाधान का माध्यम बनें। मजबूत, संवेदनशील और सद्भावपूर्ण पंचायतें ही शांतिपूर्ण तथा सहभागी ग्रामीण समाज की आधारशिला रख सकती हैं।
उन्होंने नागरिकों और पंचायत प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे विचारों में सकारात्मकता, वाणी में सत्य और व्यवहार में करुणाको प्राथमिकता दें। इससे गांवों से लेकर समाज और राष्ट्र तक आपसी विश्वास, सहयोग और सद्भाव को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा, “घृणा को प्रेम से, संघर्ष को संवाद से और हिंसा को अहिंसा से बदलना ही मानवता की सच्ची प्रगति है। शांति ही विश्वगौरव का शाश्वत स्तंभ है।”
