राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस पर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन की ओर से कर्मयोगियों को नमन, स्थानीय उत्पादों और स्वदेशी उद्यमों को बढ़ावा देने का आह्वान
लखनऊ। राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस के अवसर पर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन एवं संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने देश के लघु उद्यमियों, कारीगरों, बुनकरों, महिलाओं, युवाओं तथा मेहनतकश कर्मयोगियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके योगदान को नमन किया।

संगठन की ओर से जारी संदेश में राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि लघु उद्योग केवल आर्थिक गतिविधि का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान और रोजगार सृजन की मजबूत आधारशिला हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित छोटे-छोटे उद्योगों और पारंपरिक व्यवसायों से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है, बल्कि सामाजिक संरचना भी सुदृढ़ होती है।
उन्होंने कहा कि गाँवों और कस्बों में कारीगरों का हुनर, महिलाओं की सूझबूझ और युवाओं की ऊर्जा मिलकर विकास की नई कहानी लिख रही है। लघु उद्योगों के माध्यम से रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और लोगों को अपने पैरों पर खड़े होने का सम्मान एवं आत्मविश्वास मिलता है।

विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि महात्मा गांधी के ‘ग्राम स्वराज्य’ की परिकल्पना में स्थानीय उत्पादन और स्वावलंबन का महत्वपूर्ण स्थान था। चरखा, खादी, कुम्हार का चाक और बुनकर का करघा केवल उत्पादन के साधन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता के प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि आज देश ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में लघु उद्योगों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये उद्योग केवल व्यापार का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, रोजगार, स्थानीय विकास और समग्र आर्थिक प्रगति के वाहक हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि “छोटा कभी छोटा नहीं होता, यदि उसमें बड़े सपनों की ऊँचाई और समाज को बदलने का सामर्थ्य हो।” ग्रामीण भारत के छोटे उद्यमों को प्रोत्साहन देकर गाँवों में रोजगार और आर्थिक अवसरों का विस्तार किया जा सकता है।
उन्होंने राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस पर सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें, स्वदेशी उद्यमों को प्रोत्साहित करें और मेहनत से राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने वाले प्रत्येक हाथ का सम्मान करें।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने संकल्प व्यक्त किया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, स्थानीय प्रतिभा एवं हुनर को प्रोत्साहित करने तथा पंचायत स्तर पर आत्मनिर्भरता की भावना को बढ़ावा देने के लिए जन-जागरूकता का प्रयास निरंतर जारी रहेगा।
अंत में संगठन एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा—
“लघु उद्योग राष्ट्र की रीढ़ हैं, आत्मनिर्भरता की पहचान हैं और समाज की असली ताकत हैं। इनके सशक्त होने से ही गाँव, गरीब और सामान्य परिवार आर्थिक रूप से मजबूत होकर राष्ट्र निर्माण में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।”
