सौर ऊर्जा के विस्तार से ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार को मिलेगी नई गति
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने अक्षय ऊर्जा के अधिकतम उपयोग का किया आह्वान
लखनऊ। अक्षय ऊर्जा दिवस के अवसर पर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा एवं अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोतों के व्यापक उपयोग पर जोर दिया। संगठन ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा न केवल पर्यावरण संरक्षण का मजबूत माध्यम है, बल्कि गांवों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी रास्ता भी है।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि देश के गांवों में अक्षय ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं। ग्राम पंचायतों में सोलर स्ट्रीट लाइट, सौर ऊर्जा आधारित पेयजल व्यवस्था, पंचायत भवनों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम, सोलर कैमरे और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को अक्षय ऊर्जा से जोड़कर बिजली की बचत के साथ गांवों को आधुनिक एवं आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा—
“अक्षय ऊर्जा केवल बिजली का विकल्प नहीं, बल्कि स्वच्छ और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की मजबूत नींव है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि प्रत्येक ग्राम पंचायत को चरणबद्ध रूप से हरित एवं ऊर्जा आत्मनिर्भर पंचायत बनाया जाए। इससे बिजली की बचत, पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी पैदा होंगे।”
उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर सौर ऊर्जा को प्राथमिकता देने से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होगी। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक भवनों, गलियों, पेयजल योजनाओं और सामुदायिक सुविधाओं को सौर ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में पंचायतों को आगे आना चाहिए।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने ग्राम प्रधानों, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीण नागरिकों से अपील की कि वे अपने-अपने गांवों में अक्षय ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ाएं और स्थानीय स्तर पर सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं को प्रोत्साहित करें।
संगठन ने कहा कि ‘हरित पंचायत–सशक्त पंचायत–आत्मनिर्भर पंचायत’ की सोच को जनभागीदारी से आगे बढ़ाकर ग्रामीण भारत को स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ विकास की दिशा में ले जाया जा सकता है।
