बलिया बलिदान दिवस के अवसर पर मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने वाले अमर वीर हुतात्माओं को कोटि-कोटि नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में बलिया की वीरभूमि का स्थान अत्यंत गौरवपूर्ण है। वर्ष 1942 में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान बलिया के वीर सपूतों ने अंग्रेजी हुकूमत के दमन और अत्याचार के विरुद्ध अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान का परिचय दिया। जनआंदोलन की प्रखर चेतना ने बलिया को स्वतंत्रता संघर्ष के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित किया।
बलिया के वीरों ने यह सिद्ध किया कि जब राष्ट्र की स्वतंत्रता और सम्मान का प्रश्न सामने हो, तो जनशक्ति किसी भी दमनकारी सत्ता के सामने झुकती नहीं है। उनका संघर्ष केवल तत्कालीन स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, त्याग, एकता और राष्ट्रनिष्ठा का प्रेरणास्रोत भी बन गया।
आज बलिया बलिदान दिवस हमें उन महान हुतात्माओं के त्याग और संघर्ष को स्मरण करने के साथ-साथ राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा देता है। उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर हमें लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक समरसता, जनसेवा और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प लेना चाहिए।
बलिया के वीर सपूतों का शौर्य और बलिदान भारतीय इतिहास की अमर धरोहर है। उनकी स्मृति सदैव राष्ट्रभक्ति की लौ को प्रज्वलित करती रहेगी।
समस्त बलियावासियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों को बलिया बलिदान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
अमर बलिदानियों को शत-शत नमन।
जय हिंद!
