आजीविका और स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेंगी ग्रामीण महिलाएं, संगठन ने पात्र परिवारों से आगे आने की अपील की
लखनऊ। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में स्वयं सहायता समूह (SHG) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहे पात्र परिवारों की महिला सदस्यों को भी स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें आजीविका, स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें।
राशन कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, विधवा पेंशन, जल जीवन मिशन सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहे परिवारों की महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बचत, स्वरोजगार और सामूहिक आजीविका गतिविधियों की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि ग्रामीण परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महिलाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वयं सहायता समूह महिलाओं को केवल आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से महिलाओं में नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की क्षमता और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने पात्र परिवारों की महिलाओं से अपील की कि वे अपने क्षेत्र में संचालित स्वयं सहायता समूहों की जानकारी प्राप्त करें और समूह से जुड़कर सरकार की आजीविका एवं स्वरोजगार संबंधी योजनाओं का लाभ उठाएं। इसके लिए संबंधित ब्लॉक मिशन कार्यालय/विकासखंड स्तर के मिशन कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
संगठन ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना ग्रामीण विकास को गति देने के साथ-साथ आत्मनिर्भर गांवों की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से परिवार की आय बढ़ाने और गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
