प्रशासक व्यवस्था में विकास कार्यों की रफ्तार धीमी होने पर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने जताई चिंता
लखनऊ। प्रदेश की ग्राम पंचायतों में निर्वाचित ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासकों की नियुक्ति किए जाने के पश्चात कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की गति प्रभावित होने का मामला सामने आया है। सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था सहित विभिन्न जनहितकारी कार्यों के प्रभावित होने को लेकर ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने चिंता जताई है।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने इस संबंध में प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रतिवेदन भेजकर ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को निर्बाध रूप से संचालित कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की मांग की है।
प्रतिवेदन में कहा गया है कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं। पंचायतों में प्रशासकीय व्यवस्था लागू होने के कारण विकास कार्यों में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वीकृत एवं प्रस्तावित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाना आवश्यक है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने कहा कि प्रशासक व्यवस्था संक्रमणकालीन हो सकती है, लेकिन विकास कार्यों की निरंतरता किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए। शासन स्तर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर प्रशासकों को विकास कार्यों के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक अधिकार एवं प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेश की ग्राम पंचायतों में लंबित विकास कार्यों की समीक्षा कराकर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए। साथ ही ग्राम पंचायतों में उपलब्ध विकास निधि के पारदर्शी और समयबद्ध उपयोग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशानी न उठानी पड़े।
अवस्थी ने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी व्यक्ति या व्यवस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि गांवों में विकास की गति और पंचायती राज व्यवस्था की प्रभावशीलता बनाए रखना है। पंचायत चुनाव तक प्रशासनिक व्यवस्था के दौरान भी ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री स्तर से इस विषय का संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, जिससे प्रदेश की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को पुनः गति मिल सके।
