प्रशासकों को छह माह का एक और कार्यकाल मिलने के आसार, विधानसभा चुनाव के बाद पंचायत चुनाव की संभावना
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति के बीच अब आरक्षण प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण संकेत सामने आए हैं। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा पंचायतों में आरक्षण से संबंधित अपनी रिपोर्ट नवंबर-दिसंबर 2026 तक सौंपे जाने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट के बाद आरक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और पंचायत चुनाव की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो सकेगी।
मौजूदा परिस्थितियों में ग्राम पंचायतों में प्रशासकों का कार्यकाल आगे बढ़ने के आसार भी बन रहे हैं। पंचायत चुनाव में देरी के कारण निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले भी शासन स्तर पर छह माह तक प्रशासनिक व्यवस्था जारी रखने का प्रावधान किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, समर्पित आयोग प्रदेश के विभिन्न जिलों में पिछड़े वर्ग की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति से संबंधित आंकड़ों का अध्ययन कर रहा है। आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण का आधार तय किया जाएगा। इसके बाद आरक्षण निर्धारण और चुनाव संबंधी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
आयोग की ओर से कई जिलों में सर्वे का कार्य जारी रहने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में नवंबर-दिसंबर तक रिपोर्ट आने की स्थिति में उसके बाद आरक्षण प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। इसके चलते त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले कराने को लेकर बनी अटकलों पर फिलहाल संशय बना हुआ है।
गौरतलब है कि प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो चुका है, जबकि क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों के कार्यकाल भी समाप्त हो चुके हैं। चुनाव में देरी के कारण प्रशासनिक व्यवस्था के तहत निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी दी गई है।
ऐसे में आरक्षण आयोग की रिपोर्ट, उसके बाद आरक्षण निर्धारण और चुनाव प्रक्रिया की समय-सारिणी अब पंचायत चुनाव की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। नवंबर-दिसंबर में आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही चुनाव की वास्तविक समय-सीमा को लेकर स्थिति और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।
