लखनऊ। श्रावण मास भारतीय सनातन परंपरा में भगवान आशुतोष की आराधना, साधना और आत्मशुद्धि का परम पावन काल माना गया है। इसी पुण्य अवसर पर संपन्न होने वाली कांवड़ यात्रा श्रद्धा, तपस्या, संयम, सेवा और लोकमंगल की ऐसी अखंड परंपरा है, जो करोड़ों शिवभक्तों को एक ही आध्यात्मिक सूत्र में पिरोती है।
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक चन्द्र अवस्थी ने समस्त प्रदेशवासियों एवं शिवभक्तों को श्रावण मास की हार्दिक मंगलकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा केवल जलाभिषेक की धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि “श्रद्धा से साधना, साधना से सेवा और सेवा से लोककल्याण” की भारतीय जीवन-दृष्टि का सजीव स्वरूप है।
उन्होंने कहा कि शिवभक्तों की सेवा को भारतीय संस्कृति में पुण्य कर्म माना गया है। अतः ग्राम पंचायतों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों को मिलकर कांवड़ यात्रियों के लिए शुद्ध पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा, विश्राम, प्रकाश एवं आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था में सहयोग करना चाहिए।
श्री अवस्थी ने कहा कि भगवान शिव त्याग, तपस्या, करुणा और समरसता के प्रतीक हैं। इसलिए कांवड़ यात्रा के दौरान प्रत्येक श्रद्धालु संयम, शालीनता, अनुशासन एवं परस्पर सम्मान का परिचय दे। मार्ग में एंबुलेंस, विद्यालय वाहनों तथा आपातकालीन सेवाओं को प्राथमिकता देना मानवता और लोकधर्म का सर्वोच्च दायित्व है।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को भी शिवभक्ति का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि प्रकृति की रक्षा ही परमात्मा की आराधना का एक स्वरूप है। अतः प्लास्टिक का परित्याग, स्वच्छता का पालन तथा पर्यावरण-अनुकूल साधनों का प्रयोग कर कांवड़ यात्रा को स्वच्छ एवं प्रकृति-सम्मत बनाने का संकल्प लिया जाए।
उन्होंने कहा कि—
“महादेव की आराधना तभी पूर्ण मानी जा सकती है, जब हमारी भक्ति में सेवा, हमारे आचरण में संयम, हमारे हृदय में करुणा और हमारे संकल्प में लोककल्याण का भाव विद्यमान हो।”
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि इस पावन श्रावण मास में कांवड़ यात्रा को आस्था के साथ अनुशासन, भक्ति के साथ सेवा, धर्म के साथ सद्भाव तथा श्रद्धा के साथ पर्यावरण संरक्षण का अनुपम पर्व बनाएं।
ॐ नमः शिवाय।
हर-हर महादेव।
