वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 16 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों का 34,49,301 आवासों का लक्ष्य सूची में शामिल; AwaasPlus 2024 सर्वे और प्रतीक्षा सूची के आधार पर पात्र परिवारों को मिलेगा लाभ
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उपलब्ध कराई गई राज्यवार लक्ष्य सूची में 16 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए कुल 34,49,301 ग्रामीण आवासों का लक्ष्य दर्शाया गया है। सूची के अनुसार बिहार को सर्वाधिक 11,18,937 आवासों का लक्ष्य मिला है, जबकि उत्तर प्रदेश 6,18,482 आवासों के लक्ष्य के साथ दूसरे स्थान पर है।

इस आवंटन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ना है। हालांकि, ये आंकड़े उपलब्ध कराई गई सूची पर आधारित हैं। इन्हें केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के आधिकारिक आदेश से मिलान करना आवश्यक है।
सभी 16 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के आवास लक्ष्य

उपलब्ध सूची के अनुसार राज्यवार आवास लक्ष्य निम्नलिखित हैं:
क्र.सं. राज्य/केंद्रशासित प्रदेश आवास लक्ष्य
1 आंध्र प्रदेश 3,00,000
2 असम 3,86,507
3 बिहार 11,18,937
4 छत्तीसगढ़ 3,65,179
5 दादरा एवं नगर हवेली 7,109
6 गोवा 595
7 हरियाणा 28,422
8 हिमाचल प्रदेश 12,429
9 केरल 10,934
10 लद्दाख 2,998
11 लक्षद्वीप 93
12 राजस्थान 2,89,395
13 सिक्किम 4,749
14 तेलंगाना 2,00,000
15 उत्तर प्रदेश 6,18,482
16 पश्चिम बंगाल 1,00,000
कुल योग 34,49,301
बिहार को सर्वाधिक, उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर
राज्यवार आंकड़ों में बिहार को 11,18,937 आवासों का लक्ष्य दिया गया है। उत्तर प्रदेश के लिए 6,18,482, असम के लिए 3,86,507 तथा छत्तीसगढ़ के लिए 3,65,179 आवासों का लक्ष्य दर्शाया गया है।
इसी प्रकार आंध्र प्रदेश को 3,00,000, राजस्थान को 2,89,395 और तेलंगाना को 2,00,000 आवासों का लक्ष्य बताया गया है। पश्चिम बंगाल के लिए 1,00,000 आवासों का लक्ष्य सूची में शामिल है।
अन्य राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में हरियाणा को 28,422, हिमाचल प्रदेश को 12,429, केरल को 10,934, दादरा एवं नगर हवेली को 7,109, सिक्किम को 4,749, लद्दाख को 2,998, गोवा को 595 तथा लक्षद्वीप को 93 आवासों का लक्ष्य दर्शाया गया है।
AwaasPlus 2024 से पात्र परिवारों की पहचान
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत AwaasPlus 2024 सर्वेक्षण का उद्देश्य योजना के दायरे से छूटे पात्र ग्रामीण परिवारों की पहचान करना है। सर्वेक्षण में दर्ज परिवारों की पात्रता, निर्धारित मानकों और लागू सत्यापन प्रक्रिया के अनुसार जांच की जाती है।
ग्राम सभा एवं संबंधित प्रशासनिक स्तरों पर सत्यापन और लागू अपीलीय प्रक्रिया के बाद पात्र परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार स्थायी प्रतीक्षा सूची में शामिल किया जाता है। केवल सर्वे में नाम दर्ज होने से आवास स्वीकृति सुनिश्चित नहीं होती। आवास का आवंटन उपलब्ध लक्ष्य, पात्रता, प्राथमिकता और स्वीकृति प्रक्रिया के अधीन होता है।
कितनी मिलती है आवास सहायता?
योजना के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार मैदानी क्षेत्रों में पात्र लाभार्थियों को ₹1.20 लाख तथा पूर्वोत्तर एवं निर्दिष्ट पहाड़ी क्षेत्रों में ₹1.30 लाख की आवास सहायता दी जाती है। राशि निर्धारित किस्तों और प्रक्रियाओं के अनुसार जारी होती है।
इसके अतिरिक्त पात्र परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए ₹12,000 की सहायता तथा मनरेगा के तहत नियमानुसार 90 से 95 दिनों की अकुशल मजदूरी का प्रावधान भी हो सकता है। लाभ संबंधित योजना मानकों और पात्रता शर्तों के अधीन हैं।
ग्रामीण परिवारों के लिए जरूरी जानकारी
ग्रामीण परिवार अपने सर्वेक्षण विवरण, पात्रता, प्रतीक्षा सूची और आवास स्वीकृति की स्थिति की जानकारी ग्राम पंचायत, संबंधित विकासखंड कार्यालय अथवा आधिकारिक PMAY-G पोर्टल से प्राप्त करें। किसी भी अपुष्ट सूची के आधार पर आवास स्वीकृत होने का दावा न मानें।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने और ग्रामीण जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
