शरद पूर्णिमा: आस्था, प्रकृति, प्रेम और लोककल्याण का अनुपम पर्व
शरद पूर्णिमा विशेष लेख….मेरी कलम से …
-विवेक चन्द्र अवस्थी
राष्ट्रीय अध्यक्ष
ग्रामीण सत्ता पंचायतीराज संगठन
दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्।
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥

शरद पूर्णिमा भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का एक महत्वपूर्ण पर्व है। वर्षा ऋतु के समापन और शरद ऋतु के आगमन के साथ प्रकृति एक नई आभा से आलोकित हो उठती है। निर्मल आकाश, चंद्रमा की उज्ज्वल चाँदनी और उत्सवमय वातावरण जनमानस में आनंद, शांति एवं सकारात्मकता का संचार करते हैं।

भारतीय धार्मिक मान्यताओं में शरद पूर्णिमा का विशेष स्थान है। अनेक परिवारों में इस अवसर पर खीर बनाने, पूजा-अर्चना करने तथा रात्रि में चंद्रमा के दर्शन की परंपरा है। लोकविश्वास के अनुसार खीर को चाँदनी में रखने की परंपरा भी प्रचलित है। यह पर्व हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने और पारिवारिक आत्मीयता को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।

शरद पूर्णिमा का वास्तविक संदेश केवल व्यक्तिगत सुख और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में प्रेम, सद्भाव, सहयोग और सहभागिता की भावना को मजबूत करने की प्रेरणा भी देता है। त्योहारों की खुशियाँ तब और सार्थक हो जाती हैं, जब उनका आनंद समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचे।
हमारा गाँव हमारी साझा विरासत है। गाँव की उन्नति केवल सड़कों, भवनों और सुविधाओं से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, भाईचारे, समान अवसरों और संवेदनशील सामाजिक व्यवस्था से भी सुनिश्चित होती है।
इस पावन अवसर पर हम संकल्प लें कि जरूरतमंद परिवारों, बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और वंचित वर्गों के सम्मान एवं सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहेंगे। सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देंगे तथा ग्रामसभा और जनभागीदारी के माध्यम से विकास की नई राह प्रशस्त करेंगे।
पंचायतीराज व्यवस्था लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की आधारशिला है। सशक्त ग्राम पंचायतें, जागरूक नागरिक और सक्रिय ग्रामसभाएँ ही आत्मनिर्भर एवं विकसित ग्रामीण भारत के निर्माण की मजबूत नींव हैं।
शरद पूर्णिमा के इस शुभ अवसर पर हमें स्वच्छ, हरित, शिक्षित, स्वस्थ और समरस गाँव बनाने का संकल्प लेना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण, जल संचयन, स्वच्छता, महिला सशक्तीकरण और युवाओं की रचनात्मक भागीदारी को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करना चाहिए।
आइए, पर्व की उज्ज्वल चाँदनी की तरह हमारे विचारों में भी उदारता, हमारे व्यवहार में विनम्रता और हमारे कार्यों में जनसेवा का प्रकाश हो।
शरद पूर्णिमा के पावन पर्व पर आप सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और नई ऊर्जा का संचार हो। परिवारों में प्रेम, समाज में सद्भाव और गाँवों में विकास की नई रोशनी फैले, यही मंगलकामना है।
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥
सभी ग्रामवासियों, पंचायत प्रतिनिधियों, संगठन पदाधिकारियों ,पंचायतकर्मियों एवं देशवासियों को शरद पूर्णिमा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
सर्वे भवन्तु सुखिनः।सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत्॥
